गुरुग्राम बनेगा ग्लोबल कैपेबिलिटी कैपिटल, हरियाणा ने नई नीति को दी मंजूरी

हरियाणा सरकार ने राज्य को वैश्विक सेवा और अनुसंधान केंद्रों का प्रमुख गंतव्य बनाने के लिए ‘हरियाणा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) नीति-2026’ को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में पारित इस नीति का उद्देश्य गुरुग्राम को वैश्विक क्षमता केंद्रों की राजधानी के रूप में स्थापित करना है। इस नीति के तहत अगले कुछ वर्षों में 100 से अधिक नए जीसीसी को राज्य में आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।

ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर बहुराष्ट्रीय कंपनियों की पूर्ण स्वामित्व वाली रणनीतिक इकाइयां हैं जो तकनीकी सहायता, अनुसंधान एवं विकास, डेटा एनालिटिक्स और आईटी परिचालन का प्रबंधन करती हैं। भारत में वर्तमान में करीब 1,700 जीसीसी संचालित हैं जिनमें 19 लाख पेशेवर कार्यरत हैं। हरियाणा में पहले से ही 270 से अधिक जीसीसी काम कर रहे हैं, और नई नीति इस मौजूदा ताकत को और विस्तार देने का प्रयास है।

नई नीति के तहत गुरुग्राम में समर्पित जीसीसी मिशन स्थापित किया जाएगा जिसमें निवेशकों के लिए सिंगल विंडो डेस्क, इन्वेस्टर मैचमेकिंग प्लेटफार्म और एडवाइजरी काउंसिल का गठन शामिल है। कंपनियों को पांच से नौ वर्षों तक परिचालन सहायता प्रदान की जाएगी जो अधिकतम 15 करोड़ रुपये प्रति वर्ष तक हो सकती है। उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से निकटता, बेहतर कनेक्टिविटी और कुशल मानव संसाधन हरियाणा को जीसीसी निवेश के लिए आदर्श विकल्प बनाते हैं।

नीति की खास बात यह है कि यह केवल गुरुग्राम तक सीमित नहीं है बल्कि फरीदाबाद, पंचकूला, सोनीपत, करनाल और हिसार जैसे अन्य शहरों में भी जीसीसी निवेश को बढ़ावा देगी। डीएसआईआर और सीएसआईआर मान्यता प्राप्त अनुसंधान केंद्रों को भी पूंजीगत सहायता देने का प्रावधान है। इस नीति से आईटी, इंजीनियरिंग, वित्त, डेटा साइंस और एआई क्षेत्रों में युवाओं के लिए उच्च वेतन वाली नौकरियों के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।