गुरुग्राम में 408 ईडब्ल्यूएस फ्लैट आवंटन पर हाई कोर्ट सख्त, सरकार से मांगा स्पष्ट जवाब

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने गुरुग्राम में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और बीपीएल परिवारों के लिए आवंटित 408 फ्लैटों के मामले में हरियाणा सरकार की स्टेटस रिपोर्ट को अधूरा करार देते हुए स्पष्ट जवाब मांगा है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने कहा कि सरकार की रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि फ्लैटों का आवंटन अभी भी प्रभावी है या उसे रद्द कर दिया गया है।

यह मामला ईश्वर सिंह और एक अन्य याचिकाकर्ता द्वारा दायर जनहित याचिका से संबंधित है, जिसमें 9 फरवरी 2021 के आवंटन आदेश की वैधता को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि ईडब्ल्यूएस और बीपीएल वर्ग के लिए आरक्षित फ्लैटों का आवंटन निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से नहीं किया गया। अदालत ने याचिका में उठाए गए आरोपों को गंभीरता से लेते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया में मिलीभगत की शिकायतें हैं।

गुरुग्राम एंटी करप्शन ब्यूरो के डीएसपी द्वारा दाखिल स्टेटस रिपोर्ट में बताया गया कि मामले में दोषी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और 10 आरोपितों में से सात को गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि, अदालत ने पाया कि रिपोर्ट में सबसे महत्वपूर्ण सवाल का जवाब नहीं दिया गया है।

खंडपीठ ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया है कि वह अतिरिक्त हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट करे कि आवंटन बरकरार है या नहीं। अदालत ने जांच की वर्तमान स्थिति भी रिकॉर्ड पर लाने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर को निर्धारित की गई है। यह मामला गरीब वर्ग के आवास अधिकारों और सरकारी आवंटन प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल उठाता है।