चंडीगढ़, हरियाणा सरकार ने निजी विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली पर नियंत्रण को मजबूत करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने हरियाणा निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक 2025 की अधिसूचना जारी कर दी है। इसके तहत अब छात्रों के भविष्य से जुड़ी गंभीर लापरवाही या राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मामलों में दोषी पाए जाने वाले निजी विश्वविद्यालयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकेगी।

यह संशोधन फरीदाबाद स्थित अल फलाह विश्वविद्यालय से जुड़े विवाद के बाद किया गया है जहां विश्वविद्यालय से जुड़े कुछ शिक्षकों की भूमिका दिल्ली के लाल किला विस्फोट मामले में सामने आई थी। इस घटना के बाद निजी विश्वविद्यालयों की जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ गया था।
अब तक लागू हरियाणा निजी विश्वविद्यालय अधिनियम 2006 में निजी विश्वविद्यालय के प्रबंधन को भंग करने या प्रशासक नियुक्त करने की कोई स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित नहीं थी। इसी कानूनी कमी को दूर करने के लिए अधिनियम में नई धारा 44-बी को जोड़ा गया है।
संशोधित प्रावधानों के अनुसार
यदि कोई निजी विश्वविद्यालय राष्ट्रविरोधी गतिविधियों, गंभीर प्रशासनिक चूक या छात्रों के हितों के खिलाफ कार्य करता पाया जाता है तो राज्य सरकार उसके प्रबंधन को भंग कर वहां प्रशासक नियुक्त कर सकेगी। सरकार का मानना है कि यह कदम उच्च शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता अनुशासन और सुरक्षा को सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएगा।