India–China relations : भारत, चीन और अमेरिका के बीच संबंधों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार आकलन किया जा रहा है। हाल के घटनाक्रमों के बाद इन तीनों देशों के आपसी रिश्ते एक बार फिर वैश्विक चर्चा के केंद्र में हैं। इसी क्रम में अमेरिकी कांग्रेस द्वारा गठित यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन भारत की भूमिका को लेकर एक सार्वजनिक सुनवाई आयोजित करने जा रहा है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य भारत-चीन-अमेरिका संबंधों के व्यापक प्रभावों को समझना बताया गया है।

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यह सुनवाई आगामी रिपोर्टिंग साइकिल की पहली बैठक होगी

जिसमें इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उभरते रणनीतिक परिदृश्य, आर्थिक सहयोग और तकनीकी विकास जैसे विषयों पर विचार किया जाएगा। आयोग के अनुसार, चर्चा का फोकस इस बात पर रहेगा कि भारत किस तरह से क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर अपनी भूमिका को आगे बढ़ा रहा है और इसका अंतरराष्ट्रीय संतुलन पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।


भारत और अमेरिका के बीच बीते वर्षों में रक्षा, व्यापार और तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए दोनों देशों ने कई मंचों पर साझेदारी भी की है हालांकि, हालिया वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और व्यापारिक नीतियों को लेकर कुछ मतभेद भी सामने आए हैं, जिन्हें दोनों पक्ष संवाद के माध्यम से सुलझाने की बात कहते रहे हैं विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मतभेद किसी भी बहुपक्षीय रिश्ते का सामान्य हिस्सा होते हैं।


इसी दौरान भारत और चीन के बीच संवाद की प्रक्रिया भी आगे | India–China relations

दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संपर्क सीमा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत और क्षेत्रीय संपर्क को लेकर पहल को स्थिरता की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। हवाई सेवाओं की बहाली और निवेश से जुड़े कुछ फैसलों को भी इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के अनुसार ऐसे प्रयासों का उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव को कम करना और व्यावहारिक सहयोग के रास्ते खुले रखना है। India–China relations


यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन की सुनवाई में यह समझने का प्रयास किया जाएगा कि भारत-चीन आर्थिक संबंध वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और तकनीकी विकास को किस तरह प्रभावित कर सकते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर फार्मास्युटिकल सेक्टर और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में भारत की बढ़ती भूमिका पर भी चर्चा संभावित है इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि भारत द्वारा घरेलू उत्पादन और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की नीतियां किस दिशा में आगे बढ़ रही हैं। India–China relations


हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की गतिविधियों को क्षेत्रीय सुरक्षा के नजरिये से महत्वपूर्ण माना जाता है। समुद्री मार्गों की सुरक्षा क्षेत्रीय सहयोग और बहुपक्षीय अभ्यासों में भारत की भागीदारी को वैश्विक स्थिरता से जोड़कर देखा जाता है। इसी कारण अमेरिका सहित कई देश भारत की भूमिका को एक व्यापक रणनीतिक संदर्भ में समझना चाहते हैं। India–China relations

अमेरिकी आयोग की यह प्रक्रिया किसी एक देश के पक्ष या विरोध में निर्णय लेने के बजाय नीति-निर्माण के लिए तथ्यों और विश्लेषण को एकत्र करने की कवायद के रूप में देखी जा रही है आयोग वर्ष भर में विभिन्न सुनवाइयों के माध्यम से जानकारी जुटाता है और इसके आधार पर अपनी वार्षिक रिपोर्ट तैयार करता है जिसे बाद में अमेरिकी कांग्रेस के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है। India–China relations


भारत की विदेश नीति को लंबे समय से संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के रूप में देखा जाता रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत ने सहयोग और संवाद पर जोर देते हुए अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का यह रुख उसे विभिन्न वैश्विक शक्तियों के साथ काम करने की गुंजाइश देता है। India–China relations


कुल मिलाकर, अमेरिका में प्रस्तावित यह सुनवाई भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को समझने की एक औपचारिक प्रक्रिया मानी जा रही है बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरणों के बीच भारत किस तरह से आर्थिक, रणनीतिक और कूटनीतिक संतुलन बनाए रखता है, यह आने वाले समय में वैश्विक राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण विषय बना रहेगा।