Haryana Nikay Chunav हरियाणा में होने वाले शहरी निकाय चुनावों में इस बार वीवीपैट (वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रायल मशीन) का उपयोग नहीं किया जाएगा। राज्य चुनाव आयोग ने वीवीपैट की कमी का हवाला देते हुए यह निर्णय लिया है। इससे मतदाताओं में यह चिंता बढ़ गई है कि वे यह सत्यापित नहीं कर पाएंगे कि उनका वोट सही उम्मीदवार को गया है या नहीं।

मतदाता नहीं देख पाएंगे अपने वोट का सत्यापन
वीवीपैट से जुड़ी ईवीएम में वोट डालने के बाद सात सेकेंड तक स्क्रीन पर जानकारी दिखाई देती है, जिससे मतदाता यह सुनिश्चित कर सकता है कि उसका वोट सही उम्मीदवार को गया है। हालांकि, चुनाव आयोग का कहना है कि ईवीएम पूरी तरह सुरक्षित हैं और किसी भी तरह से हैक नहीं की जा सकती हैं।
एडवोकेट हेमंत कुमार ने की वीवीपैट के उपयोग की मांग
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने राज्य चुनाव आयुक्त धनपत सिंह को पत्र लिखकर शहरी निकाय चुनाव वीवीपैट के साथ कराने का अनुरोध किया था। इसके जवाब में राज्य चुनाव आयोग ने दो पेज का पत्र भेजकर वीवीपैट के अभाव में चुनाव कराने की मजबूरी के ठोस कारण बताए।
दो और नौ मार्च को होंगे चुनाव
हरियाणा में 2 और 9 मार्च को कुल 33 शहरी निकायों में चुनाव होंगे, जिनमें आठ नगर निगम, चार नगर परिषद और 21 नगरपालिका समितियों के चुनाव शामिल हैं। इसके अलावा, दो नगर निगमों में मेयर पद का उपचुनाव और तीन नगर पालिका समितियों में एक-एक वार्ड में उपचुनाव कराए जाएंगे।
लोकसभा और विधानसभा चुनावों में वीवीपैट का उपयोग अनिवार्य
सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2013 में निर्देश दिया था कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में ईवीएम के साथ वीवीपैट का उपयोग किया जाए। यह निर्णय तब लिया गया था जब कई राजनीतिक दलों ने ईवीएम में गड़बड़ी और हैकिंग की आशंका जताई थी।
हरियाणा सरकार ने पहले भी मांगी थीं नई ईवीएम
राज्य चुनाव आयोग ने 2020 में भारतीय चुनाव आयोग से 45,000 एम-3 मॉडल की नई तकनीक वाली ईवीएम की मांग की थी, लेकिन केंद्र ने केवल एम-2 मॉडल की पुरानी ईवीएम लोन पर देने की पेशकश की। भारतीय चुनाव आयोग की नीति के अनुसार, राज्य निर्वाचन आयोगों को एम-3 मॉडल की ईवीएम प्रदान नहीं की जाती हैं।
राज्य चुनाव आयोग खुद खरीद सकता है नई मशीनें
हरियाणा चुनाव आयोग के पास अपने स्तर पर एम-3 मॉडल यानी वीवीपैट के साथ मेल खाने वाली नई ईवीएम खरीदने का अधिकार है। हालांकि, यह खरीदारी तब तक नहीं हो सकती जब तक आयोग की तकनीकी मूल्यांकन समिति इसका डिज़ाइन अंतिम रूप नहीं देती और आवश्यक मात्रा में ईवीएम खरीदी नहीं जातीं।