
हरियाणा में कांग्रेस लंबे समय बाद सड़कों पर सक्रिय दिखाई दे रही है। प्रभारी संजय दत्त और प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह की पहल पर पार्टी के सभी बड़े नेता विरोध प्रदर्शनों में शामिल हो रहे हैं। ब्लॉक स्तरीय सम्मेलनों और धरनों में कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा देखने को मिल रही है। पिछले 12 वर्षों से सत्ता से दूर रहे वरिष्ठ नेता भी जनता के बीच सक्रिय हो गए हैं।
हालांकि इस एकजुटता की तस्वीर के पीछे पुरानी गुटबाजी अभी भी मौजूद है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का खेमा राज्य में सबसे प्रभावशाली बना हुआ है। छह में से पांच सांसद और अधिकतर विधायक हुड्डा गुट से जुड़े हैं। दीपेंद्र सिंह हुड्डा को भावी मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट करने की रणनीति पार्टी में विवाद का कारण बन गई है। कुमारी सैलजा लगातार संगठनात्मक मुद्दों पर हुड्डा खेमे पर निशाना साध रही हैं।
पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह और उनके बेटे बृजेंद्र सिंह भी हुड्डा खेमे के खिलाफ मुखर हो रहे हैं। हिसार लोकसभा चुनाव में हार के बाद बृजेंद्र चुनावी रणनीति और नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं। इसके विपरीत, रणदीप सिंह सुरजेवाला संयमित रुख अपनाते हुए सभी गुटों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।
संजय दत्त की भूमिका यहां महत्वपूर्ण है, जो नेताओं को व्यक्तिगत खेमेबाजी से ऊपर उठाकर पार्टी के मुद्दों पर केंद्रित करने का प्रयास कर रहे हैं। फिलहाल कार्यकर्ता सक्रिय दिख रहे हैं, लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब यह सड़क संघर्ष चुनावी रणनीति और साझा नेतृत्व में बदलेगा। यदि हर नेता केवल अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में लगा रहा, तो आज की एकजुटता कल तक नहीं टिकेगी।