
हरियाणा कांग्रेस में आंतरिक कलह का नया दौर शुरू हो गया है। ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर जिलाध्यक्षों में गहरी नाराजगी फैल गई है। सोनीपत में शुक्रवार को आयोजित पार्टी की समीक्षा बैठक में यह असंतोष खुलकर सामने आया, जहां जिलाध्यक्षों ने प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह पर अपनी सलाह को नजरअंदाज करने के गंभीर आरोप लगाए।
कांग्रेस प्रभारी संजय सतीशचंद्र दत्त की मौजूदगी में हुई इस बैठक में करनाल, हिसार, सिरसा और चरखी दादरी के जिलाध्यक्षों ने विशेष रूप से अपनी आपत्ति दर्ज कराई। जिलाध्यक्षों का कहना है कि पार्टी ने उनसे तीन नामों का पैनल मांगा था, लेकिन कई ब्लॉकों में ऐसे व्यक्तियों को जिम्मेदारी सौंप दी गई जिनका पैनल में नाम ही नहीं था। विरोध की गंभीरता को देखते हुए हिसार जिले के ब्लॉक अध्यक्षों की सूची होल्ड कर दी गई है।
जिलाध्यक्षों ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के उस बयान का भी हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि जिलाध्यक्षों को इतना सशक्त बनाया जाएगा कि वे चुनावों में उम्मीदवार तय करने में मुख्य भूमिका निभाएंगे। इसके विपरीत, ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति में ही उनकी राय को दरकिनार कर दिया गया। जिलाध्यक्षों का आरोप है कि विधायकों और पूर्व विधायकों की पसंद के चेहरों को ‘पैराशूट’ की तरह लाया जा रहा है।
प्रदेश प्रभारी सतीश चंद्र ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए जांच का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि अगर कोई पार्टी में काम की बजाय नेता के सहारे आगे बढ़ा है तो उससे जिम्मेदारी वापस लेकर किसी और को सौंपी जाएगी। प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने अपने तर्क प्रस्तुत किए, लेकिन जिलाध्यक्षों का गुस्सा अभी शांत नहीं हुआ है। यह विवाद कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की मुहिम में एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।