बृजभूषण शरण सिंह यौन उत्पीड़न मामले में बरी, दिल्ली कोर्ट का फैसला

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार को पूर्व भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों से जुड़े यौन उत्पीड़न मामले में बरी कर दिया। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने सुबह 10:30 बजे यह फैसला सुनाया। पूर्व बीजेपी सांसद सिंह अदालत में मौजूद थे और उनकी ओर से वकील राजीव मोहन, ऋषभ भाटी तथा रेहान खान पेश हुए, जबकि महिला पहलवानों का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ वकील रेबेका जॉन ने किया।

यह मामला जनवरी 2023 में सुर्खियों में आया था जब ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक, बजरंग पूनिया और विनेश फोगाट ने सिंह पर यौन उत्पीड़न और पद के दुरुपयोग का आरोप लगाया था। अप्रैल में प्रदर्शन दोबारा शुरू हुए और पहलवानों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अंततः 28 अप्रैल को दिल्ली पुलिस ने सात शिकायतकर्ताओं की शिकायत पर आईपीसी की धारा 354, 354A, 354D और 34 के तहत एफआईआर दर्ज की, जिसमें एक नाबालिग भी शामिल थी।

मई 2024 में ट्रायल कोर्ट ने पांच शिकायतकर्ताओं से जुड़े मामलों में सिंह के खिलाफ आरोप तय किए थे, जबकि एक मामले में उन्हें मुक्त कर दिया गया था। सह-आरोपी विनोद तोमर पर केवल आपराधिक धमकी देने का आरोप लगाया गया था। शिकायतकर्ताओं ने अपने बयानों में कहा था कि वे सिंह से बचने के लिए समूह में घूमती थीं और उत्पीड़न के कारण उनका मानसिक स्वास्थ्य और खेल प्रदर्शन प्रभावित हुआ था।

बचाव पक्ष ने दलील दी कि शिकायतकर्ताओं की गवाही में महत्वपूर्ण अंतर थे और कुछ ने तारीख तथा स्थान बदल दिए थे। वकीलों ने ‘अलीबाई’ का तर्क देते हुए कहा कि अभियोजन के रिकॉर्ड से ही साबित होता है कि सिंह कथित घटनाओं के समय उन स्थानों पर मौजूद नहीं थे। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि शिकायतकर्ताओं ने कई सालों तक शिकायत क्यों नहीं की और इस दौरान सार्वजनिक रूप से सिंह के साथ सामान्य व्यवहार किया। POCSO के तहत नाबालिग से जुड़ा मामला मई 2025 में पहले ही बंद हो चुका है।