Artificial Intelligence

Artificial Intelligence (AI) को लेकर देश और दुनिया में बहस लगातार तेज हो रही है। भारत में भी युवाओं के बीच एक बड़ा सवाल बार-बार सामने आता है क्या Artificial Intelligence आने से नौकरियां प्रभावित होंगी? इसी चर्चा के बीच प्रधानमंत्री ने तकनीक और रोजगार के संबंध पर संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है।

Artificial Intelligence

राजधानी दिल्ली में आयोजित एआई इंपैक्ट समिट 2026

प्रधानमंत्री ने Artificial Intelligence को भविष्य की चुनौती नहीं बल्कि वर्तमान की आवश्यकता बताया। उनका संदेश स्पष्ट था कि तकनीक बदलाव लाती है लेकिन साथ ही नए अवसरों का द्वार भी खोलती है। उन्होंने माना कि जॉब मार्केट को लेकर युवाओं की चिंता स्वाभाविक है, लेकिन समाधान डर में नहीं बल्कि तैयारी में छिपा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जोर देकर कहा कि बदलती तकनीक के दौर में स्किलिंग और री-स्किलिंग अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। उनका मानना है कि नई तकनीक को अपनाने के साथ साथ मानव संसाधन को तैयार करना आवश्यक है ताकि रोजगार के नए आयाम विकसित हो सकें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि Artificial Intelligence को रोकना या उससे बचना व्यावहारिक समाधान नहीं है; बल्कि इसके साथ सामंजस्य बनाकर आगे बढ़ना ही सही दिशा है।

AI को लेकर उन्होंने इसे एक फोर्स मल्टीप्लायर के रूप में देखा, जो पेशेवरों की दक्षता और पहुंच दोनों को बढ़ा सकता है। उनका कहना था कि AI डॉक्टरों, शिक्षकों, वकीलों और अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञों को अधिक लोगों तक सेवाएं पहुंचाने में सहायक बन सकता है। इस दृष्टिकोण में Artificial Intelligence इंसानों की जगह लेने वाली तकनीक नहीं बल्कि उनकी क्षमताओं को सशक्त करने वाला उपकरण है।

इतिहास का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि तकनीकी क्रांतियों ने हमेशा काम के स्वरूप को बदला है, समाप्त नहीं किया। औद्योगिक और डिजिटल बदलावों के दौर में भी यही आशंका रही कि मशीनें रोजगार खत्म कर देंगी, लेकिन वास्तविकता में नए उद्योग और नई नौकरियां सामने आईं। आज उभरते तकनीकी क्षेत्रों में दिखाई दे रही संभावनाएं उसी परिवर्तन का उदाहरण हैं।

भारत के संदर्भ में Artificial Intelligence को उन्होंने एक बड़े अवसर के रूप में रेखांकित किया

देश की युवा आबादी, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और तेजी से बढ़ती तकनीकी अर्थव्यवस्था Artificial Intelligence युग में भारत को मजबूत स्थिति प्रदान करती है। उनका संदेश साफ था कि आने वाले समय में सफलता उन्हीं को मिलेगी जो सीखने, स्वयं को अपडेट रखने और नई तकनीकों के साथ तालमेल बैठाने के लिए तैयार रहेंगे।

अंततः केंद्रीय विचार यही रहा कि तकनीक से भयभीत होने के बजाय तैयारी और अनुकूलन पर ध्यान देना अधिक आवश्यक है। बदलते जॉब मार्केट में स्थिरता का सबसे बड़ा आधार कौशल विकास और निरंतर सीखने की क्षमता ही होगी।