
हरियाणा में नायब सिंह सैनी की सरकार ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। पहले चरण में अगले वर्ष की शुरुआत में राज्य भर में पंचायती भूमि के 10 प्रतिशत हिस्से को प्राकृतिक खेती के लिए पट्टे पर दिया जाएगा। यह पहल रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने, खेती की लागत घटाने और मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक अहम कदम है।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने हाल में विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक में इस योजना की समीक्षा की और इसे शीघ्र लागू करने के निर्देश दिए। सरकार की 800 एकड़ भूमि पर पहले से ही प्राकृतिक खेती हो रही है, अब इस पहल को पंचायती स्तर तक विस्तारित किया जा रहा है। प्राकृतिक खेती से उत्पादित अनाज की बिक्री के लिए मंडियों में अलग से व्यवस्था की जाएगी, जिससे किसानों को उचित मूल्य मिल सके।
गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत इस आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। वे अपने कुरुक्षेत्र स्थित गुरुकुल में देसी गाय के गोबर और गोमूत्र से तैयार जीवामृत एवं बीजामृत के माध्यम से प्राकृतिक खेती के प्रयोग कर रहे हैं। उनका मानना है कि यह पद्धति मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, जल संरक्षण और खेती की लागत कम करने में कारगर है।
राज्य सरकार ने किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को पांच साल तक 10 हजार रुपये प्रति एकड़ वार्षिक सहायता दी जाएगी। देसी गाय खरीदने पर 30 हजार रुपये तक अनुदान की व्यवस्था है। इसके अलावा ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ योजना के तहत धान की जगह दूसरी फसलें अपनाने और 1.40 लाख एकड़ सेमग्रस्त भूमि सुधारने का लक्ष्य रखा गया है। पंचायती भूमि के पट्टे की शर्तें और किसानों के चयन का विस्तृत खाका जल्द ही सामने आने की उम्मीद है।