
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा के सरकारी स्कूलों में लगभग दो दशक से गेस्ट फैकल्टी और व्याख्याता के रूप में कार्यरत शिक्षकों को बड़ी राहत प्रदान की है। जस्टिस संदीप मौदगिल की पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वर्ष 2014 की नियमितीकरण नीति के अनुसार इन शिक्षकों की सेवाओं को स्थायी किया जाए और उन्हें सभी सेवा तथा सेवानिवृत्ति लाभ दिए जाएं।
यह मामला सुखविंदर सिंह एवं अन्य द्वारा दायर याचिका से संबंधित है, जिसमें 2005-06 में नियुक्त गेस्ट टीचरों ने अपनी सेवाओं के नियमितीकरण की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि उनकी नियुक्ति विधिवत प्रक्रिया – विज्ञापन, चयन समिति गठन और मेरिट सूची के आधार पर की गई थी। राज्य सरकार ने दलील दी कि यह नियुक्तियां केवल अस्थायी व्यवस्था थीं, लेकिन अदालत ने इस तर्क को खारिज कर दिया।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति ‘बैकडोर एंट्री’ नहीं थी, बल्कि पारदर्शी प्रक्रिया से हुई थी। अदालत ने कहा कि लगभग 20 वर्षों तक लगातार सेवा लेने के बाद इन्हें केवल ‘स्टॉपगैप अरेंजमेंट’ बताना आत्मविरोधी और अनुचित है। हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि शिक्षक राष्ट्र निर्माण की आधारशिला हैं और उन्हें मनमाने ढंग से उपयोग नहीं किया जा सकता।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के ‘मदन सिंह बनाम हरियाणा राज्य’ मामले का हवाला देते हुए 2014 की नियमितीकरण नीति की वैधता को दोहराया। अंतिम आदेश में हरियाणा सरकार को दो महीने के भीतर नियमितीकरण प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया है। गेस्ट टीचर एसोसिएशन के नेता रघु वत्स ने बताया कि राज्य में लगभग 12,700 गेस्ट टीचर इस फैसले से लाभान्वित होंगे और उनकी वर्षों की लड़ाई सफल हुई है।