AI Impact Summit के दौरान गलगोटिया यूनिवर्सिटी को लेकर सोशल मीडिया और टेक समुदाय में चर्चा तेज हो गई। समिट में प्रदर्शित कुछ तकनीकी मॉडलों और डेमो प्रोडक्ट्स को लेकर सवाल उठे, जिनमें रोबोटिक डॉग, थर्माकोल ड्रोन और सॉकर ड्रोन प्रमुख रहे। इन घटनाओं ने न केवल यूनिवर्सिटी के स्टॉल बल्कि शैक्षणिक संस्थानों द्वारा इनोवेशन की प्रस्तुति के तरीकों पर भी व्यापक बहस को जन्म दिया।

विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब यूनिवर्सिटी के स्टॉल पर प्रदर्शित रोबोटिक डॉग की पहचान टेक उत्साही लोगों ने यूनिट्री Go2 मॉडल के रूप में की यह एक व्यावसायिक रूप से उपलब्ध रोबोट है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न रिसर्च, सर्विलांस और लर्निंग उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जाता है।
सोशल मीडिया पर कुछ यूज़र्स ने सवाल उठाए कि क्या इस प्रोडक्ट को यूनिवर्सिटी के स्वयं के विकास के रूप में प्रस्तुत किया गया था या यह केवल एक लर्निंग डेमो का हिस्सा था। इस पर यूनिवर्सिटी की ओर से स्पष्टीकरण जारी किया गया जिसमें कहा गया कि रोबोटिक डॉग को छात्रों के लर्निंग टूल के रूप में प्रदर्शित किया गया था और इसे स्वनिर्मित तकनीक के रूप में पेश करने का उद्देश्य नहीं था। बाद में यूनिवर्सिटी ने संचार से जुड़े भ्रम के लिए खेद भी व्यक्त किया।
रोबोटिक डॉग के बाद चर्चा थर्माकोल ड्रोन | AI Impact Summit
एक वायरल वीडियो में स्टॉल पर रखे गए ड्रोन मॉडल को लेकर लोगों ने जिज्ञासा व्यक्त की कि यह कार्यशील प्रोटोटाइप था या कॉन्सेप्ट मॉडल। टेक समुदाय में कई प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं, जहां कुछ लोगों ने इसे बेसिक DIY प्रोजेक्ट जैसा बताया, जबकि अन्य ने कहा कि प्रोटोटाइप डेवलपमेंट के शुरुआती चरणों में ऐसे मॉडल सामान्य होते हैं। इस विषय पर यूनिवर्सिटी की ओर से औपचारिक प्रतिक्रिया सीमित रही, जिससे ऑनलाइन बहस और बढ़ गई।

इसी क्रम में सॉकर ड्रोन भी चर्चा का केंद्र बना। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में यूनिवर्सिटी के संचार विभाग से जुड़ी प्रोफेसर ने ड्रोन की इंजीनियरिंग और विकास प्रक्रिया को इन-हाउस बताया। इसके बाद कुछ टेक ऑब्जर्वर्स ने अंतरराष्ट्रीय उत्पादों से समानता के आधार पर सवाल उठाए।
हालांकि, इस मुद्दे पर आधिकारिक तकनीकी दस्तावेज या विस्तृत डेमो सार्वजनिक रूप से साझा नहीं किए गए, जिससे विभिन्न दावे और प्रतिक्रियाएं समानांतर रूप से चलती रहीं।
यह घटनाक्रम एक व्यापक मुद्दे की ओर संकेत करता है | AI Impact Summit
शैक्षणिक संस्थानों द्वारा इनोवेशन और रिसर्च आउटपुट की प्रस्तुति। टेक इवेंट्स और समिट्स का उद्देश्य अक्सर उभरती तकनीकों, प्रोटोटाइप्स और शोध कार्यों को मंच प्रदान करना होता है।
कई बार कॉन्सेप्ट मॉडल, लर्निंग डेमो और कमर्शियल हार्डवेयर का मिश्रण भी प्रदर्शनों का हिस्सा होता है ऐसे में पारदर्शिता, स्पष्ट लेबलिंग और तकनीकी विवरणों की उपलब्धता अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है, ताकि दर्शकों, मीडिया और उद्योग जगत में किसी प्रकार का भ्रम न उत्पन्न हो।
गलगोटिया यूनिवर्सिटी देश की प्रमुख निजी विश्वविद्यालयों में से एक मानी जाती है और यहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा उन्नत तकनीकी पाठ्यक्रमों की पढ़ाई कराई जाती है। इस विवाद ने यह प्रश्न भी उठाया कि क्या भविष्य में टेक समिट्स और शैक्षणिक प्रदर्शनियों के लिए अधिक सख्त डिस्क्लोजर नॉर्म्स या स्टैंडर्ड प्रेजेंटेशन गाइडलाइंस की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि AI जैसे तेजी से विकसित होते क्षेत्र में, इनोवेशन की विश्वसनीयता और प्रस्तुति की स्पष्टता दोनों ही समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। AI Impact Summit
AI समिट्स और टेक्नोलॉजी एक्सपो न केवल तकनीक के प्रदर्शन के मंच हैं, बल्कि विश्वास, शोध संस्कृति और अकादमिक ईमानदारी के प्रतीक भी बनते जा रहे हैं। इस तरह की घटनाएं संस्थानों, आयोजकों और प्रतिभागियों के लिए एक सीख के रूप में देखी जा सकती हैं, जहां पारदर्शिता, तकनीकी सत्यापन और सटीक संचार भविष्य की प्राथमिकताएं बन सकती हैं।