UGC Draft यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन UGC Draft के हालिया ड्राफ्ट गाइडलाइंस को लेकर देशभर में बहस जारी है। इसी क्रम में ओलंपिक पदक विजेता और मशहूर पहलवान योगेश्वर दत्त ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा कर अपनी राय रखी है।

उन्होंने अपने संदेश में महाभारत के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए अन्याय, प्रतिभा और नैतिक साहस जैसे विषयों पर बात की।
योगेश्वर दत्त ने अपने पोस्ट में पौराणिक उदाहरणों के माध्यम से यह संकेत देने की कोशिश की कि जब समाज या व्यवस्था में अन्याय होता है और सक्षम लोग चुप रहते हैं, तो उसके दूरगामी परिणाम देखने को मिलते हैं। उन्होंने द्रौपदी चीरहरण प्रसंग का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय अनेक शक्तिशाली योद्धाओं ने परिस्थितियों के बावजूद मौन बनाए रखा, जिसका अंततः विनाशकारी परिणाम हुआ।
उन्होंने विभीषण के उदाहरण का उल्लेख करते हुए यह भी कहा कि केवल शांत स्वभाव या मौन रहने से सम्मान नहीं मिलता, बल्कि सही और गलत के बीच अंतर समझकर समय पर पक्ष लेना जरूरी होता है। उनके अनुसार, अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना नैतिक जिम्मेदारी है, क्योंकि कोई भी व्यक्ति अमर नहीं है।

योगेश्वर दत्त ने पांडवों का उल्लेख करते हुए कहा कि संख्या में कम होने के बावजूद जब योग्यता, सत्य और साहस साथ होते हैं, तो परिस्थितियां बदलती हैं। उन्होंने संकेत दिया कि प्रतिभा के दमन से समाज और संस्कृति दोनों को नुकसान पहुंचता है।
उनका यह भी कहना था कि जिन पूर्वजों ने कठिन परिस्थितियों में भी मूल्यों और सीमाओं की रक्षा की, आज उनकी आने वाली पीढ़ियों को अपने अधिकारों और सुरक्षा को लेकर संघर्ष करना पड़ रहा है, जो आत्मचिंतन का विषय है।
दत्त ने अपने पोस्ट में यह चेतावनी भी दी कि अगर पूर्वाग्रह और असंतुलन को समय रहते नहीं समझा गया तो इसका असर देश के भविष्य पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि सही समय पर दृढ़ता और साहस दिखाना आवश्यक होता है।
UGC Draft उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव से जुड़े मुद्दों को संबोधित करने के उद्देश्य से लाया गया बताया जा रहा है। इसे देशभर के विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू किए जाने का प्रस्ताव है, जिसका प्रभाव छात्रों के साथ-साथ शिक्षकों और कर्मचारियों पर भी पड़ेगा।

इस UGC Draft को लेकर अलग-अलग मत सामने आ रहे
कुछ वर्ग इसे भेदभाव रोकने की दिशा में कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि इसके कुछ प्रावधानों पर पुनर्विचार की जरूरत है। इसी बीच यूजीसी रेगुलेशन 2026 के कुछ प्रावधानों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई है।
फिलहाल यह मुद्दा सामाजिक और शैक्षणिक स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर और स्पष्टता सामने आने की उम्मीद है।