Year Ender 2024 हिसार नगर निगम में इस साल कई मुद्दों पर ध्यान दिया गया, लेकिन सफाई व्यवस्था, बेसहारा पशुओं की समस्या, और प्रॉपर्टी टैक्स रिकॉर्ड सुधार में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ। इन समस्याओं का प्रभाव आम नागरिकों पर पड़ा और लोगों को प्रशासन से निराशा का सामना करना पड़ा।

सफाई व्यवस्था में सुधार की उम्मीदें फिर भी अधूरी
नगर निगम ने इस साल दो डोर टू डोर कचरा उठाने के लिए टेंडर लगाए, जिससे शहरवासियों को सफाई में सुधार की उम्मीद थी। हालांकि, कचरा उठाने की व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया। अब भी सड़कों के किनारे कचरे के ढेर लगे रहते हैं, और कई बार घरों से कचरा उठाने में काफी देरी हो जाती है। इसके अलावा, सफाई कर्मचारी अक्सर झाड़ू लगाते हुए दिखाई नहीं देते। नागरिकों को कचरे का उठान करवाने के लिए हेल्पलाइन का सहारा लेना पड़ता है।
बेसहारा पशुओं की समस्या और निगम की नाकामी
पहले नगर निगम के पास एक ही पशु पकड़ने की गाड़ी थी, जो खटारा हालत में थी। अब निगम ने दो नई गाड़ियां खरीदी हैं, और कुल मिलाकर तीन गाड़ियां हो चुकी हैं। इसके बावजूद शहर की सड़कों पर बेसहारा पशुओं की संख्या में कमी नहीं आई है, और सड़क हादसों की घटनाएं जारी हैं। यह दर्शाता है कि निगम के पास पर्याप्त संसाधन होने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।
प्रॉपर्टी टैक्स रिकॉर्ड की स्थिति में सुधार नहीं
इस साल भी प्रॉपर्टी टैक्स का रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं हो सका। हालांकि समाधान शिविर लगाए गए, लेकिन रिकॉर्ड को सही करने में कोई सफलता नहीं मिल पाई। निगम में कुल 1.52 लाख प्रॉपर्टी हैं, जिनका टैक्स रिकॉर्ड अभी तक ठीक नहीं किया जा सका है, जिसके कारण नागरिकों को परेशानी हो रही है।
निगम ने नए संसाधन खरीदे
सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए निगम ने एक बड़ी और एक छोटी रोड स्वीपिंग मशीन खरीदी। ट्रक माउंटेड रोड स्वीपिंग मशीन की कीमत 93 लाख 90 हजार रुपये थी, जबकि इटली मेड छोटी रोड स्वीपिंग मशीन की लागत करीब 91 लाख रुपये थी। इसके अलावा, पानी के छिड़काव के लिए दो स्प्रिंकलर मशीनें भी खरीदी गईं।
निगम कार्यालय का पुनरोद्धार
निगम कार्यालय का भी पुनरोद्धार किया गया, जिसमें अधिकारियों के लिए नए कमरे और एक नया मीटिंग हॉल तैयार किया गया। इसके अतिरिक्त, नागरिक सुविधा केंद्र शुरू किया गया, जहां लोग प्रॉपर्टी टैक्स से संबंधित फाइलें निशुल्क लगा सकते हैं।
शहरवासियों की राय
शहरवासियों का कहना है कि सफाई व्यवस्था में सुधार की बजाय स्थिति और बिगड़ी है। सत्येंद्र यदुवंशी (सूर्य नगर) ने बताया कि सफाई कर्मचारी सड़क पर दिखाई नहीं देते और कई दिन तक सफाई नहीं होती। अनिल शर्मा (मिल गेट) ने बताया कि प्रॉपर्टी टैक्स का रिकॉर्ड निजी कंपनी के सर्वे के बाद गलत हो गया था, लेकिन निगम कर्मचारी अब तक इसे सही नहीं कर पाए। एडवोकेट योगेश सिहाग ने बताया कि निगम की कार्यप्रणाली भी बेपटरी है और कोई भी काम समय पर नहीं होता। जगदीश पूनिया (आजाद नगर) ने कहा कि बेसहारा पशु अब भी सड़कों पर घूम रहे हैं और लोगों को चोट पहुंचा रहे हैं, लेकिन निगम अधिकारियों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।