HARYANA VRITANT

Sonipat News सोनीपत के खरखौदा स्थित फिरोजपुर बांगर क्षेत्र में बिना लाइसेंस के चल रही एक दवा फैक्ट्री का पर्दाफाश हुआ है। एफडीए (औषधि नियंत्रक विभाग) की टीम ने वरिष्ठ ड्रग कंट्रोल अधिकारी राकेश दहिया की अगुवाई में छापा मारकर इस अवैध फैक्ट्री का खुलासा किया। जांच में सामने आया कि यहां हिमाचल प्रदेश की तीन कंपनियों की दवाइयों का उत्पादन किया जा रहा था।

फैक्ट्री मालिक राजस्थान का निवासी

एफडीए को इस फैक्ट्री के संचालन की सूचना कई दिनों से मिल रही थी। छापेमारी के दौरान फैक्ट्री मालिक मनोज मौके पर नहीं मिला, जोकि राजस्थान का रहने वाला है। वहीं, मौके से सिरसा निवासी योगेश को पकड़ा गया, जो फैक्ट्री की देखरेख करता था।

दवाओं के सैंपल लिए गए

टीम ने जांच के दौरान फैक्ट्री में तैयार की जा रही दवाओं के छह सैंपल लिए हैं, ताकि उनकी गुणवत्ता की जांच की जा सके। जब्त की गई दवाओं में पेंटाप्राजोल, सिफैक्जीम-200 (माइकोसेफ-एलबी 200), एजिथ्रोमाइसीन-200 (रिक-200) और एमोक्सी प्लस क्लेवम एट शामिल हैं।

मशीनें और स्टॉक किया गया सील

कार्रवाई के दौरान टीम ने फैक्ट्री में मौजूद सभी मशीनें, कच्चा माल और तैयार दवाओं को सील कर दिया। जांच में पाया गया कि इन दवाओं के बॉक्स पर महाराष्ट्र और हिमाचल की फार्मास्युटिकल कंपनियों के नाम अंकित थे, जिससे संबंधित कंपनियों को भी राजस्व का नुकसान हो रहा था।

देर रात तक चली जांच

एफडीए की टीम ने दोपहर से लेकर देर रात तक फैक्ट्री की गहन जांच की। जब्त किए गए दवाओं के सैंपल को सील कर विस्तृत जांच के लिए भेजा गया है। अधिकारियों के अनुसार, अगर ये दवाएं गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरती हैं, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

लोगों की सेहत से खिलवाड़

बिना लाइसेंस के दवाओं का निर्माण लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। यह मामला न सिर्फ औषधि नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे दवाओं की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े होते हैं। जांच पूरी होने के बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।