Pravasi Bharatiya Diwas (PBD) पहली बार 2003 में भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया था। यह दिन उन प्रवासी भारतीयों को सम्मानित करने के लिए मनाया जाता है, जिन्होंने विदेश में रहते हुए भी भारत के विकास में अहम योगदान दिया। 9 जनवरी को इस दिवस को मनाने का कारण यह है कि 1915 में इसी दिन महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे, जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी।

प्रवासी भारतीय दिवस के उद्देश्य
इस दिवस का मुख्य उद्देश्य प्रवासी भारतीयों के योगदान को पहचान देना, भारत और वैश्विक भारतीय समुदाय के बीच संबंधों को प्रगाढ़ करना और निवेश, पर्यटन तथा सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देना है। साथ ही, प्रवासी भारतीयों को अपने अनुभव और विशेषज्ञता के माध्यम से भारत के विकास में भागीदारी के लिए प्रेरित करना भी इसका उद्देश्य है।
पीएम मोदी के कार्यकाल में प्रवासी नीतियों में बदलाव
प्रवासी भारतीय दिवस का नया स्वरूप
2015 से Pravasi Bharatiya Diwas को हर दो वर्ष में एक बार व्यापक स्तर पर मनाने का निर्णय लिया गया। इसका उद्देश्य इस आयोजन को और प्रभावशाली तथा विशेष बनाना था। इसके अतिरिक्त, क्षेत्रीय Pravasi Bharatiya Diwas (Regional PBD) भी विभिन्न देशों में आयोजित किए जाने लगे।
डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया का प्रभाव
‘डिजिटल इंडिया’ और ‘स्टार्टअप इंडिया’ जैसी योजनाओं ने प्रवासी भारतीयों को भारत में निवेश और नवाचार के लिए प्रेरित किया। इन अभियानों ने तकनीकी क्षेत्र के प्रवासी भारतीयों को भारत के स्टार्टअप और फिनटेक इकोसिस्टम से जोड़ने में मदद की।
विदेशों में भारतीय समुदाय के साथ संवाद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशों में प्रवासी भारतीय समुदाय के साथ संवाद को एक नई परंपरा बना दिया। मैडिसन स्क्वायर (न्यूयॉर्क) और वेम्बली स्टेडियम (लंदन) जैसे भव्य कार्यक्रमों ने प्रवासी भारतीयों के बीच भारत के प्रति गर्व और जुड़ाव को बढ़ाया।
प्रवासी भारतीयों के लिए नई योजनाएं और सुधार
OCI कार्ड में सुधार
OCI (Overseas Citizen of India) कार्ड के नियमों को सरल और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाया गया। यह कार्ड प्रवासी भारतीयों के लिए एक मजबूत पहचान और भारत में अधिक सुविधाएं प्राप्त करने का माध्यम बन गया।
आपदा प्रबंधन में तेजी
प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में संकट के समय प्रवासी भारतीयों की मदद के लिए कई अभूतपूर्व कदम उठाए गए। यमन से ऑपरेशन राहत और कोविड-19 के दौरान ‘वंदे भारत मिशन’ जैसे अभियानों ने प्रवासी भारतीयों को सुरक्षित रूप से उनके घर तक पहुंचाया।
वैश्विक स्तर पर भारतीय प्रवासी समुदाय की पहचान
प्रधानमंत्री मोदी ने प्रवासी भारतीयों को भारत के “सॉफ्ट पावर” के अभिन्न हिस्से के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय मूल के नेताओं और समुदाय की भूमिका की सराहना की और उन्हें वैश्विक नेतृत्व में बढ़ावा देने की पहल की।
कल्याणकारी योजनाएं और सांस्कृतिक जुड़ाव
प्रवासी भारतीयों के लिए निवेश, व्यापार और संपत्ति खरीदने के नियमों को सरल किया गया। साथ ही, प्रवासी भारतीय दिवस को केवल एक औपचारिक आयोजन के बजाय भारतीय संस्कृति, कला और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक मंच के रूप में परिवर्तित किया गया।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रवासी भारतीयों और भारत के संबंधों में नया आयाम जुड़ा है। प्रवासी भारतीय अब केवल आर्थिक योगदानकर्ता नहीं, बल्कि भारत के “ब्रांड एंबेसडर” बन गए हैं।
“जहां भी भारतीय रहते हैं, वहां उनके दिल में हमेशा भारत बसता है। यही भावना 18वें प्रवासी भारतीय दिवस का सार है।”