HARYANA VRITANT

Panipat News पानीपत की एक अदालत ने रिश्तों को तार-तार करने वाले आरोपी पिता को कठोर सजा सुनाई है। दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली निवासी एक व्यक्ति ने अपनी 14 वर्षीय बेटी के साथ दुष्कर्म किया था। मामले की जांच में पता चला कि नाबालिग गर्भवती हो गई थी। अब फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपी को 20 साल की सजा सुनाई है, साथ ही 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

कैसे सामने आया मामला?

सेक्टर-29 थाना क्षेत्र की एक कॉलोनी निवासी महिला ने 14 अप्रैल 2023 को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी। उसने बताया कि वह एक धागा कंपनी में काम करती है और अपने पति व 14 वर्षीय बेटी के साथ पानीपत में किराए के मकान में रहती है।

एक दिन जब वह काम से वापस लौटी तो उसकी बेटी गुमसुम थी। बार-बार पूछने के बावजूद उसने कुछ नहीं बताया। कुछ दिनों बाद जब बेटी की तबीयत बिगड़ी, तो मां उसे डॉक्टर के पास ले गई। मेडिकल जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि नाबालिग गर्भवती है।

पिता ही निकला दरिंदा

मेडिकल रिपोर्ट के बाद जब मां ने बेटी से सख्ती से पूछा, तो उसने बताया कि उसका 29 वर्षीय पिता ही उसके साथ कई बार दुष्कर्म कर चुका है। इतना ही नहीं, आरोपी ने किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी भी दी थी।

महिला ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने किशोरी की काउंसलिंग करवाई और बाल कल्याण विभाग की अनुमति से 31 मई 2023 को उसका गर्भपात कराया गया। इसके बाद पुलिस ने आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया।

फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सुनाई 20 साल की सजा

इस मामले की सुनवाई पानीपत की फास्ट ट्रैक कोर्ट में हुई। अतिरिक्त सेशन जज सुखप्रीत सिंह की अदालत ने 11 गवाहों की गवाही के आधार पर आरोपी को दोषी करार दिया।

कोर्ट ने आरोपी को 20 साल की कठोर सजा सुनाई और 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। यदि आरोपी जुर्माना नहीं भरता है, तो उसे तीन साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

पंजाब में भी सामने आया था ऐसा मामला

ऐसा ही एक मामला पंजाब के रूपनगर से भी सामने आया था, जहां एक पिता पर अपनी ही बेटी से दुष्कर्म करने का आरोप लगा था। पुलिस ने पीड़िता के बयान के आधार पर आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसे ज्यूडिशियल रिमांड पर भेज दिया था।

न्याय की मिसाल बना फैसला

फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वारा सुनाया गया यह फैसला उन मामलों में एक मिसाल बन सकता है, जहां अपराधी परिवार के भीतर ही मौजूद होते हैं। इस सख्त सजा से समाज में ऐसे अपराधियों के खिलाफ डर पैदा होगा और पीड़ितों को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ेगी।