Panchkula News अमेरिका जाने के लिए डंकी रूट अपनाने वाले लोगों का सफर आसान नहीं था। उन्होंने कई कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन फिर भी अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सके। अमेरिका पहुंचने से पहले ही उन्हें डिपोर्ट कर दिया गया। कई लोगों को रास्ते में लूट लिया गया, कुछ को करंट लगाया गया, तो किसी को माफियाओं ने कैद कर लिया।

मानसिक तनाव और बर्बाद भविष्य
अमेरिका से डिपोर्ट किए गए युवा अब मानसिक तनाव में हैं। डालर की चाह, डंकी का रास्ता और डिपोर्ट—इस 3डी ट्रैप ने उनका भविष्य अंधकारमय कर दिया है। करोड़ों रुपये पानी में चले गए।
पेरू-कोलंबिया में लूट, अमेरिका में बेड़ियां
अमृतसर लौटे रोबिन हांडा ने बताया कि डंकी के जरिए अमेरिका जाना मौत को गले लगाने जैसा है। उसने बताया कि पेरू में पुलिस ने पैसे छीन लिए, कोलंबिया में माफिया ने कैद कर करंट लगाया। छह महीने की यातना सहने के बाद 22 जनवरी को अमेरिका में एंट्री की, लेकिन 12 दिन बाद ही वहां की सेना ने उसे डिटेन कर लिया। उसे आतंकियों की तरह लोहे की बेड़ियों में बांधकर कैंप में रखा गया।

पनामा के जंगलों में भटकना पड़ा
कैथल के अंकित ने बताया कि अमेरिका जाने के लिए उसने 45 लाख रुपये खर्च किए थे, लेकिन नतीजा कुछ नहीं मिला। एजेंटों के झगड़े के कारण उसे 45 दिन मैक्सिको और डेढ़ महीने ग्वाटेमाला में रखा गया। पनामा के घने जंगलों में पैदल चलने और पहाड़ों पर चढ़ने को मजबूर किया गया। वहां से अमेरिका पहुंचने में सात महीने लग गए। लेकिन पुलिस ने पकड़कर जेल में डाल दिया और फिर डिपोर्ट कर दिया।
घरौंडा का अरुण लापता
डिपोर्ट किए गए लोगों की लिस्ट में घरौंडा के अरुण पाल का नाम है, लेकिन वह अभी तक घर नहीं लौटा। परिवार उसकी वापसी की उम्मीद लगाए बैठा है, लेकिन उसका फोन भी बंद आ रहा है। परिवार ने उसकी अमेरिका यात्रा के लिए आधी एकड़ जमीन बेच दी थी और उधार लेकर 45 लाख रुपये जुटाए थे।

जेल में 15 दिन की प्रताड़ना
अंबाला के साहिल, जो महज 19 साल का है, अमेरिका में 15 दिन जेल में बंद रहा। वहां उसे हाथ और पैरों में हथकड़ियां पहनाई गईं। साहिल ने बताया कि उसे पनामा के जंगलों में भटकना पड़ा, फिर अमेरिका पहुंचते ही आत्मसमर्पण करने को मजबूर किया गया। लेकिन वहां उसे गिरफ्तार कर लिया गया और अमानवीय यातनाएं दी गईं।
अमेरिका में भी यातना, जेल में अमानवीय व्यवहार
हरियाणा के अंकित ने बताया कि डंकी रूट से अमेरिका पहुंचने के बाद उसे एक महीने तक जेल में रखा गया। इस दौरान उसे सोने तक नहीं दिया गया, खाने के लिए कच्चा-पक्का खाना ही दिया गया, और ठंड में पतली चादर से काम चलाने को मजबूर किया गया।

परिवारों की आंखों में आंसू
फतेहाबाद के गगनप्रीत सिंह की कहानी भी दर्दनाक है। तीन साल बाद अपने बेटे को देखकर उसके परिवार की आंखें भर आईं। गगनप्रीत ने अमेरिका जाने के लिए स्टडी वीजा लिया था, लेकिन वहां टिक नहीं पाया। उसने डंकी रूट से अमेरिका जाने की कोशिश की, लेकिन पकड़े जाने के बाद उसे भी डिपोर्ट कर दिया गया।
अमेरिका का सपना, कड़वी हकीकत
डंकी रूट से अमेरिका जाने का सपना देख रहे युवाओं की जिंदगी बर्बादी की ओर चली गई। न केवल वे शारीरिक और मानसिक यातनाओं से गुजरे, बल्कि उनके परिवारों की जमा-पूंजी भी बर्बाद हो गई। अब वे वापस लौटकर कर्ज और सामाजिक तिरस्कार का सामना कर रहे हैं। यह कहानी सिर्फ कुछ युवाओं की नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों की है जो अमेरिका में बेहतर भविष्य की आस में सब कुछ खो चुके हैं।