HARYANA VRITANT

Panchkula News हरियाणा सरकार ने न्यायिक सेवा से जुड़े अधिकारियों (जजों) के आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने का निर्णय लिया है। यदि सेवाकाल के दौरान किसी न्यायिक अधिकारी का निधन हो जाता है, तो उनकी पत्नी, बेटे-बेटियां या अन्य आश्रितों को नौकरी दी जाएगी। जो आश्रित नौकरी नहीं लेना चाहते, वे सरकार द्वारा निर्धारित आर्थिक सहायता का लाभ उठा सकेंगे।

मुख्य सचिव ने जारी किए निर्देश

हरियाणा सरकार ने “हरियाणा वरिष्ठ न्यायिक सेवा नियम” और “पंजाब सिविल सेवा (न्यायिक शाखा) नियम” में संशोधन किया है। मुख्य सचिव डॉ. विवेक जोशी ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं। यह नियम 1 अगस्त 2019 से लागू किए गए हैं, जिससे उन परिवारों को भी राहत मिलेगी जिनके मुखिया का निधन पिछले पांच वर्षों में हुआ है।

न्यायिक परिवारों को विकल्प: नौकरी या आर्थिक सहायता

संशोधित नियमों के तहत, न्यायिक सेवा से जुड़े परिवारों को नौकरी या आर्थिक सहायता में से एक विकल्प चुनने का अधिकार होगा। यह लाभ पहले अन्य सरकारी कर्मचारियों को मिलता था, लेकिन सेशन जज, एडिशनल सेशन जज, और हरियाणा सिविल सेवा (न्यायिक शाखा) के अधिकारियों के परिवार इस सुविधा से वंचित थे।

ग्रेच्युटी सीमा में वृद्धि

हरियाणा सरकार ने न्यायिक अधिकारियों और अपने कर्मचारियों के लिए मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी है। यह वृद्धि 1 जनवरी 2024 से प्रभावी होगी, जिससे न्यायिक अधिकारियों और उनके परिवारों को अतिरिक्त राहत मिलेगी।

हाई कोर्ट का सख्त रुख: अनुपालन में देरी पर अधिकारी पर हर्जाना

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। हाई कोर्ट ने निर्देश दिया है कि यदि 12 फरवरी 2024 के आदेश का अनुपालन 4 फरवरी 2025 तक नहीं किया गया, तो संबंधित अधिकारी को वर्चुअल सुनवाई में उपस्थित होना होगा और 50,000 रुपये का हर्जाना अपनी जेब से भुगतान करना होगा।

याचिका का विवरण

लोक संपर्क विभाग के डीआईपीआरओ सोनिया और अन्य द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए, याचिकाकर्ताओं ने बताया कि 2 अगस्त 2022 के आदेश के तहत, विशेष वेतनमान का लाभ कई कर्मचारियों को दिया गया, लेकिन याचिकाकर्ताओं को अब तक इसका लाभ नहीं मिला। अदालत ने इसे लेकर अधिकारियों को फटकार लगाई और आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

निष्कर्ष

हरियाणा सरकार का यह फैसला न्यायिक अधिकारियों के आश्रितों को राहत प्रदान करेगा और उनकी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। साथ ही, हाई कोर्ट का सख्त रुख सरकारी कार्यों में देरी को रोकने की दिशा में एक कड़ा संदेश देता है।