Panchkula News पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि अगर किसी अविवाहित युवक की सड़क दुर्घटना में मौत हो जाती है, तो उसके पिता भी मुआवजा पाने के हकदार होंगे। अदालत ने माना कि माता-पिता अपने बेटे की असमय मृत्यु से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं, और कोई भी मुआवजा उनके नुकसान की भरपाई नहीं कर सकता।

मोटर वाहन दुर्घटना मामलों में अनुमान जरूरी
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मोटर वाहन दुर्घटना से जुड़े मुआवजे के मामलों में कुछ हद तक अनुमान लगाना आवश्यक होता है। मृतक की पारिवारिक पृष्ठभूमि, शिक्षा, व्यवसाय और अन्य सहायक कारकों को ध्यान में रखते हुए मुआवजा तय किया जाना चाहिए।
यमुनानगर निवासी ने दायर की थी याचिका
इस मामले में यमुनानगर निवासी जोरा सिंह ने याचिका दायर की थी। उनका 21 वर्षीय बेटा राजिंदर सिंह, जो लॉ का छात्र था, 1996 में एक सड़क दुर्घटना में मारा गया था। परिवार ने मोटर वाहन अधिनियम के तहत 3.2 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी।
ट्रैक्टर-ट्रॉली की टक्कर से हुई थी मौत
घटना उस समय हुई जब राजिंदर सिंह अपने गांव संखेड़ा से जगाधरी लौट रहे थे। तभी तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉली ने उनकी कार को टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौत हो गई। मृतक के माता-पिता ने ट्रैक्टर चालक के खिलाफ मुआवजे का दावा दायर किया था।
पहले 2.6 लाख का मुआवजा तय, हाईकोर्ट ने बढ़ाने के दिए संकेत
मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने इस मामले में वाहन चालक की लापरवाही मानते हुए 2.6 लाख रुपये मुआवजे की राशि तय की थी। हालांकि, मृतक के माता-पिता ने इसे कम बताते हुए हाईकोर्ट में अपील की।
पिता की आय पर निर्भरता नहीं, फिर भी मिलेगा मुआवजा
दुर्घटना में शामिल वाहन चालक ने तर्क दिया कि मृतक के पिता एक प्रतिष्ठित वकील हैं और वे अपने बेटे की आय पर निर्भर नहीं थे, इसलिए उन्हें मुआवजा नहीं मिलना चाहिए। लेकिन हाईकोर्ट ने यह कहते हुए उनकी दलील खारिज कर दी कि अविवाहित बेटे की मौत पर पिता को मुआवजा मिलने से वंचित नहीं किया जा सकता।