HARYANA VRITANT

Karnal News भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष रतन मान ने सवाल उठाया है कि जब खेतों में हरियाली है और फसलें खड़ी हैं, तो एनसीआर में प्रदूषण का जिम्मेदार किसान कैसे हो सकता है। उन्होंने कहा कि पराली जलाने का धुआं प्रदूषण का केवल 5% हिस्सा है, जबकि उद्योगों और सरकारी निर्माण कार्यों से निकलने वाला धुआं अब बड़ा योगदान दे रहा है। फिर भी हर बार दोष किसानों पर ही क्यों मढ़ा जाता है?

शुगर मिल में नियमों की अनदेखी

ग्रैप-4 के सख्त नियम लागू होने के बावजूद शुगर मिल में तारकोल से सड़क निर्माण कार्य जारी है। यह काम लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा करवाया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि अधिकारियों को यह तक जानकारी नहीं थी कि ग्रैप-4 लागू हो चुका है। शुगर मिल के आसपास की कॉलोनियों के लोग जहरीले धुएं की चपेट में हैं, लेकिन अधिकारी जिम्मेदारी लेने से बच रहे हैं और एक-दूसरे पर आरोप मढ़ रहे हैं।

प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल

किसानों ने प्रशासन पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने पूछा कि क्या अधिकारी अब भी सैटेलाइट से जले फसल अवशेष ढूंढेंगे, या फिर शुगर मिल में खुलेआम हो रही नियमों की अनदेखी पर कार्रवाई करेंगे। पिछली बार ग्रैप-4 लागू होने पर किसानों पर जुर्माने और केस दर्ज करने जैसी सख्त कार्रवाई हुई थी।

गरीबों पर सख्ती, बड़े ढाबों पर चुप्पी

पर्यावरण संरक्षण से जुड़े दिलबाग कादियान और एडवोकेट राजकुमार कन्नौजिया ने कहा कि गरीब रेहड़ी संचालकों के तंदूर बंद कराए गए, लेकिन बड़े ढाबों और होटलों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। सेक्टर-12, 8, 13 और 32 में रेहड़ी वालों के तंदूरों को बंद कर दिया गया, लेकिन प्रशासन ने बड़े व्यवसायियों के प्रति नरमी बरती। यह कार्रवाई केवल राजनीतिक स्वार्थ साधने का एक जरिया बनकर रह गई।

पिछले 3 महीनों में प्रशासन की कार्रवाई

पिछले तीन महीनों में प्रशासन ने 1250 एफआईआर दर्ज की और 5 करोड़ 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। रेहड़ी संचालकों, ढाबों और फैक्टरियों पर सख्ती की गई, लेकिन अब तक शुगर मिल और अन्य बड़े संस्थानों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। 11 फैक्टरियों पर डीजल जनरेटर चलाने के कारण कार्रवाई की गई और 50 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।

शुगर मिल प्रशासन का बचाव

शुगर मिल प्रबंधन ने खुद को बचाने की कोशिश करते हुए कहा कि सड़क निर्माण का काम एमडी के निर्देश पर शुरू किया गया था। मिल के एमडी हितेंद्र शर्मा ने कहा कि ग्रैप-4 लागू होने की जानकारी थी और संबंधित अधिकारियों को काम बंद करने का निर्देश दिया गया था। लेकिन अगर नियमों की अनदेखी हुई है, तो इसकी जांच की जाएगी।

प्रदूषण नियंत्रण विभाग का बयान

प्रदूषण नियंत्रण विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी शैलेंद्र अरोड़ा ने कहा कि ग्रैप-4 के नियम सभी के लिए समान हैं। यदि शुगर मिल या किसी अन्य विभाग ने नियम तोड़ा है, तो कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन और किसानों के बीच टकराव

किसानों का कहना है कि प्रशासन हर बार उनके ऊपर सख्ती दिखाता है, जबकि सरकारी विभाग और बड़े उद्योग खुलेआम नियम तोड़ते हैं। किसानों ने मांग की है कि प्रशासन को सभी के साथ समान व्यवहार करना चाहिए और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सख्त कदम जरूरी

ग्रैप-4 लागू होने के बावजूद प्रदूषण स्तर में सुधार नहीं होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। किसानों को दोषी ठहराना आसान है, लेकिन असल जिम्मेदारियों से बचने का यह तरीका स्थायी समाधान नहीं हो सकता।

निष्कर्ष: प्रदूषण के मुद्दे पर प्रशासन को किसानों, उद्योगों और सरकारी विभागों के साथ समान रूप से कड़े कदम उठाने होंगे। शुगर मिल और अन्य संस्थानों पर कार्रवाई करते हुए यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में इस तरह की अनदेखी न हो।