Holi 2025 रोहतक में 9 मार्च से पारंपरिक कुमाऊंनी बैठकी होली का शुभारंभ हो गया है। कुमाऊं सभा महिला कीर्तन मंडली ने पारंपरिक वेशभूषा में होली गायन करते हुए इस उत्सव की शुरुआत की। वर्तमान में काॅलोनी स्थित कुमाऊं सभा धर्मशाला में होली गीतों की गूंज सुनाई दे रही है।

50 सालों से चली आ रही परंपरा
हरियाणा में कुमाऊंनी बैठकी होली बीते 50 वर्षों से अधिक समय से मनाई जा रही है। यह परंपरा उत्तराखंड के अल्मोड़ा, रानीखेत और नैनीताल से आकर बसे प्रवासियों ने शुरू की थी। आरके पालीवाल के अनुसार, 1975 में कुमाऊं सभा का गठन किया गया था ताकि इस सांस्कृतिक धरोहर को आगे बढ़ाया जा सके।
महिलाओं की होली गायन टोली सक्रिय
इस साल भी महिलाओं की बैठकी होली का आयोजन जोरों पर है। 12 मार्च को कुमाऊं सभा भवन से एकता कॉलोनी तक घर-घर जाकर होली बधाई कार्यक्रम होगा और 14 मार्च को होली उत्सव का समापन होगा।
रोहतक में 7000 उत्तराखंडी परिवार बसे
1960 के दशक में उत्तराखंड के अल्मोड़ा, रानीखेत और नैनीताल क्षेत्रों से आकर रोहतक में सर्विसमैन बसने लगे। समय के साथ इनका परिवार बढ़ता गया और वर्तमान में करीब 7000 उत्तराखंडी परिवार रोहतक के विभिन्न क्षेत्रों में निवास कर रहे हैं।
क्या खास है कुमाऊंनी होली में?
कुमाऊं सभा के प्रधान आनंद सिंह कड़ाकोटी और महासचिव त्रिलोक सिंह चौधरी के अनुसार, कुमाऊंनी होली केवल अबीर-गुलाल तक सीमित नहीं है। इसमें शास्त्रीय संगीत की परंपरा के तहत बैठकी होली और खड़ी होली दोनों शामिल हैं।
- बैठकी होली: इसमें महिलाएं मीराबाई, नजीर और बहादुर शाह जफर की रचनाएं गाती हैं।
- खड़ी होली: पुरुष पारंपरिक टोपी, कुर्ता और चूड़ीदार पायजामा पहनकर ढोल-दमाऊ और हुड़के की धुनों पर नृत्य करते हुए होली गीत गाते हैं।
पानीपत से फरीदाबाद तक गूंज रही होली की धुन
बैठकी होली केवल रोहतक तक सीमित नहीं है, बल्कि पानीपत, फरीदाबाद समेत हरियाणा के कई जिलों में भी इसकी धूम मची हुई है।
- पानीपत: कुमाऊं संस्थान के प्रधान गौरव रावत के अनुसार, 1984 से यहां होली गायन की परंपरा जारी है।
- फरीदाबाद: कुमाऊं भ्रात मंडल के प्रधान बालम सिंह बिष्ट ने बताया कि 7 मार्च से बैठकी होली की शुरुआत हो चुकी है, जहां महिलाएं घर-घर जाकर होली गायन कर रही हैं।
🎶 होली की इस अनूठी परंपरा में रंगने के लिए हर कोई उत्साहित है!