Hisar News हांसी के व्यापारी राममेहर ने 1.41 करोड़ रुपये का बीमा क्लेम पाने के लिए एक खतरनाक साजिश रची। उसने खुद को मृत घोषित करने के लिए अपने ही गांव डाटा में अपने ही नाम के व्यक्ति, राममेहर उर्फ रमलू को ढूंढा।

कोर्ट का फैसला: दोषी राममेहर को उम्रकैद
रमलू हत्याकांड में एडीजे गगनदीप मित्तल की अदालत ने मुख्य आरोपी राममेहर को दोषी करार दिया और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने चार दिन पहले ही उसे दोषी ठहरा दिया था, लेकिन सजा के ऐलान को एक दिन के लिए टाल दिया गया था।
परिवार ने फैसले पर जताया संतोष
रमलू के परिजनों ने अदालत के इस फैसले का स्वागत किया और कहा कि ऐसे अपराधी को कठोरतम सजा मिलनी चाहिए। उनके अनुसार, यह अपराध न केवल रमलू की हत्या तक सीमित था, बल्कि इसने उनके पूरे परिवार को प्रभावित किया।
अदालत में वकील ने रखा तर्क
पीड़ित पक्ष के वकील लाल बहादुर खोवाल ने अदालत में तर्क दिया कि यह एक जघन्य अपराध है, जिसे बड़ी चालाकी और सोची-समझी योजना के तहत अंजाम दिया गया। रमलू की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में किसी भी नशीले पदार्थ या शराब के सेवन का कोई संकेत नहीं मिला, जिससे साफ होता है कि यह हत्या एक ठंडे दिमाग से रची गई साजिश थी।
रमलू की दर्दनाक हत्या
राममेहर ने अपनी महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए निर्दोष रमलू को जिंदा जला दिया। रमलू के परिवार में 10 सदस्य थे, जो पूरी तरह से उस पर निर्भर थे। इस हत्याकांड ने न केवल रमलू की जान ली, बल्कि उसके पूरे परिवार को असहनीय पीड़ा दी।
राममेहर के निजी जीवन के खुलासे
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि राममेहर के तीन महिलाओं से अवैध संबंध थे। इस मामले में कोर्ट ने पहले ही राधा नाम की महिला को बरी कर दिया था।
ऐसे दी गई हत्या को अंजाम
राममेहर ने गांव में घूम-घूमकर ऐसा व्यक्ति तलाशा, जिसकी कद-काठी और उम्र उससे मिलती-जुलती हो। उसने रमलू को विश्वास में लेकर अपनी कार में बैठाया और कुछ देर घुमाने के बाद उसकी गला दबाकर हत्या कर दी। हत्या को वास्तविक दिखाने के लिए उसने 9 लाख रुपये नकद भी निकाल लिए थे।