Hisar Airport हिसार हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने की प्रक्रिया 2014 में शुरू हुई थी। उस समय एयरपोर्ट के पास केवल 200 एकड़ जमीन थी, लेकिन दो चरणों में इसमें 7,000 एकड़ अतिरिक्त भूमि जोड़ी गई। इस विस्तार के साथ, यह देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनने जा रहा है, क्योंकि किसी अन्य भारतीय हवाई अड्डे के पास इतनी जमीन नहीं है।

डीजीसीए टीम का निरीक्षण और आपत्तियां
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) और ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी की छह सदस्यीय टीम ने एयरपोर्ट का निरीक्षण किया। टीम ने कुछ आपत्तियां दर्ज की हैं और 28 फरवरी तक उन्हें दूर करने का समय दिया गया है। यदि यह समयसीमा पूरी कर ली जाती है, तो 8 मार्च तक एयरपोर्ट को हवाई सेवा संचालन का लाइसेंस मिल सकता है।
अगस्त 2024 में भी हुई थी जांच
इससे पहले, अगस्त 2024 में भी DGCA की टीम ने तीन दिनों तक निरीक्षण किया था और 44 छोटी-बड़ी आपत्तियां दर्ज की थीं। इन कारणों से एयरपोर्ट को लाइसेंस नहीं मिल सका था। हालांकि, सभी आपत्तियों को ठीक कर रिपोर्ट DGCA को सौंप दी गई थी।
नाइट लैंडिंग के लिए जरूरी सिस्टम बाकी
एयरपोर्ट पर अभी लैंडिंग इंस्ट्रूमेंट सिस्टम (LIS) लगाना बाकी है। जब तक यह सिस्टम स्थापित नहीं होगा, तब तक हवाई अड्डे पर नाइट लैंडिंग की अनुमति नहीं मिलेगी। हालांकि, कैट आई लाइट सिस्टम पहले ही लगाया जा चुका है।
उड़ान सेवाएं जल्द शुरू होने की उम्मीद
हरियाणा सरकार पहले ही जयपुर, अहमदाबाद, चंडीगढ़, अयोध्या और जम्मू के लिए उड़ान सेवाओं का एमओयू कर चुकी है। अधिकारियों के मुताबिक, आपत्तियों को जल्द दूर कर उड़ान सेवाएं जल्द शुरू करने की योजना है।
अधिकारियों का बयान:
“इतना बड़ा प्रोजेक्ट होने के कारण कुछ आपत्तियां आना स्वाभाविक है। लेकिन इन्हें जल्द से जल्द दूर कर लिया जाएगा और हिसार एयरपोर्ट से उड़ान सेवाएं जल्द शुरू होंगी।”