Haryana Nikay Chunav हरियाणा में 2 मार्च को होने वाले शहरी निकाय चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पूरी तरह से सक्रिय है। पार्टी ने प्रचार अभियान में पूरी ताकत झोंक दी है और इसे विधानसभा चुनावों की तरह गंभीरता से लड़ रही है। मुख्यमंत्री नायब सैनी खुद हर नगर निगम में जाकर जनसभाएं कर रहे हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल चुनाव को लेकर निष्क्रिय नजर आ रहे हैं।

भाजपा का आक्रामक प्रचार अभियान
भाजपा ने ट्रिपल इंजन सरकार के नारे के साथ चुनावी प्रचार तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी हर नगर निगम में जनसभाएं कर रहे हैं और जनता से भाजपा को जिताने की अपील कर रहे हैं।
इसके अलावा, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल, कृष्णपाल गुर्जर, और राव इंद्रजीत सिंह भी अपने-अपने क्षेत्रों में पार्टी उम्मीदवारों को जिताने के लिए सक्रिय हो चुके हैं। भाजपा ने चुनाव को मजबूती से लड़ने के लिए एक दर्जन मंत्रियों को अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी दी है।
भाजपा सरकार के पूर्व मंत्री, पार्टी पदाधिकारी, राज्यसभा सदस्य, सांसद और विधायक भी इस चुनाव में पूरी ताकत झोंक रहे हैं। पार्टी ने यह संकेत दिया है कि शहरी निकाय चुनावों में अच्छा प्रदर्शन करने वाले विधायकों और नेताओं को बोर्ड, निगम और आयोगों में चेयरमैन पद दिया जा सकता है।
कांग्रेस की निष्क्रियता और रणनीति की कमी
कांग्रेस इस चुनाव को लेकर अब तक कोई ठोस रणनीति नहीं बना पाई है। पार्टी के नेता चुनाव प्रचार के बजाय स्टार प्रचारकों की सूची में फेरबदल करने में ही उलझे हुए हैं।
दीपेंद्र हुड्डा केवल रोहतक नगर निगम के चुनाव पर ध्यान दे रहे हैं, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा केवल उन्हीं नगर निगमों में जा रहे हैं, जहां उन्हें बुलाया गया है। कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेता जैसे रणदीप सुरजेवाला, कुमारी सैलजा और अजय सिंह यादव ने अब तक चुनाव प्रचार में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है।
प्रदेश अध्यक्ष चौधरी उदयभान को पार्टी के अंदर ही विरोध का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि कई नेताओं को स्टार प्रचारकों की सूची में जगह नहीं मिली।
कांग्रेस प्रत्याशी तक नहीं उतार पाई
कांग्रेस की कमजोरी इस बात से भी जाहिर होती है कि वह सभी वार्डों में प्रत्याशी तक खड़े नहीं कर पाई। कई वार्ड ऐसे हैं, जहां कांग्रेस उम्मीदवारों को सिंबल तक अलॉट नहीं किए गए।
स्थिति को संभालने के लिए कांग्रेस के सह प्रभारी जितेंद्र बघेल अब चुनाव प्रचार में सक्रिय होने की कोशिश कर रहे हैं। वह अगले दो दिनों तक फरीदाबाद और रोहतक में रहकर चुनावी रणनीति को धार देने का प्रयास करेंगे।
अन्य विपक्षी दल भी निष्क्रिय
कांग्रेस ही नहीं, आम आदमी पार्टी (AAP), जननायक जनता पार्टी (JJP) और इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) भी इस चुनाव में निष्क्रिय नजर आ रहे हैं।
दिल्ली में हाल ही में मिली हार के बाद AAP केवल औपचारिकता निभा रही है, जबकि JJP और INLD ने अब तक शहरी निकाय चुनाव में अपनी कोई मजबूत उपस्थिति दर्ज नहीं कराई है।
निष्कर्ष
हरियाणा निकाय चुनाव में भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी है और संगठित रणनीति के साथ आक्रामक प्रचार कर रही है। दूसरी ओर, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल अब तक चुनावी मोड में नहीं आए हैं।
अब देखना यह होगा कि क्या विपक्ष अंतिम समय में अपनी रणनीति में कोई बदलाव करता है, या फिर भाजपा की जीत लगभग तय मानी जाएगी।