विधानसभा सत्र के दौरान यह साफ हुआ कि हरियाणा के सरकारी अधिकारी और कर्मचारी सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर कमाई कर सकते हैं। कांग्रेस विधायक शीशपाल केहरवाला के सवाल पर मुख्यमंत्री नायब सिंह ने बताया कि इस पर कोई पाबंदी नहीं है, लेकिन कुछ नियम तय किए गए हैं।

- कर्मचारी सालाना 8,000 रुपये तक की कमाई कर सकते हैं।
- यदि आय इससे अधिक होती है, तो एक तिहाई हिस्सा सरकारी खजाने में जमा करना होगा।
- वे ड्यूटी के बाद इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर एक्टिव रह सकते हैं।
- यदि किसी कर्मचारी ने अपने सरकारी कार्य से अर्जित ज्ञान का उपयोग किए बिना कंटेंट बनाया है, तो वह पूरी कमाई रख सकता है।
निजी स्कूलों की मनमानी पर सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने निजी स्कूलों पर लगाम लगाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि 50 रुपये की किताब 150 रुपये में बेची जा रही है, जिसे रोका जाना चाहिए। स्कूल ड्रेस और अन्य शुल्क के नाम पर अभिभावकों से अतिरिक्त पैसे वसूले जा रहे हैं। उन्होंने इस मुद्दे की डेस्क बनाकर जांच कराने की मांग की।
कृषि विश्वविद्यालय में नियमों की अनदेखी?
विधायक शीशपाल केहरवाल ने हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार में नियमों के उल्लंघन का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कुलपति को दो साल का एक्सटेंशन देने का प्रावधान था, लेकिन सरकार ने चार साल का कार्यकाल बढ़ा दिया। इतना ही नहीं, कुलपति ने अपनी पत्नी को बगैर पद के डायरेक्टर बना दिया और 28 सेवानिवृत्त इंजीनियरों को नियुक्त कर लिया।
भाजपा विधायकों के बीच सवाल-जवाब
नसीबपुर गांव में शहीद स्मारक बनाने के मुद्दे पर भाजपा विधायक ओमप्रकाश यादव और मंत्री राव नरबीर आमने-सामने आ गए। ओमप्रकाश यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री ने स्मारक बनाने की घोषणा की थी, लेकिन मंत्री उदासीन रवैया अपना रहे हैं। इस पर राव नरबीर ने जवाब दिया कि भाजपा सरकार शहीदों का सम्मान करती है और इस मामले को गंभीरता से लिया जाएगा।