Haryana News रोहतक के पंडित भगवत दयाल स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में हुए एमबीबीएस परीक्षा घोटाले की जांच में गंभीर खामियां सामने आई हैं। तीन सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिसमें विश्वविद्यालय के छात्र और कर्मचारी भी घोटाले में संलिप्त पाए गए हैं। जांच में पता चला कि नकल माफिया प्रति विषय 3 से 6 लाख रुपये तक वसूल रहा था।

परीक्षा नियंत्रक पद से हटाए गए, कर्मचारियों पर गिरी गाज
घोटाले में संलिप्तता सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए परीक्षा नियंत्रक डॉ. अमरीश को पद से हटा दिया है। उनकी जगह डॉ. सुखदेव सिंह चांदला को नया परीक्षा नियंत्रक नियुक्त किया गया है। इसके अलावा छह नियमित कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि छह आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं।
छात्र और कर्मचारियों की मिलीभगत का पर्दाफाश
जांच में यह भी सामने आया कि इस फर्जीवाड़े में विश्वविद्यालय के 24 छात्र और 17 अन्य लोग शामिल थे। इस आधार पर कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने 41 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए जांच रिपोर्ट रोहतक एसपी को सौंप दी है। इससे पहले भी 12 जनवरी को दो नियमित कर्मचारियों को निलंबित और तीन आउटसोर्स कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया था।
इस तरह से हुआ था घोटाला
घोटाले की शुरुआत जनवरी के पहले सप्ताह में एक एमबीबीएस छात्र द्वारा भेजे गए वीडियो और गोपनीय लिखित शिकायत से हुई। शिकायत में खुलासा हुआ कि परीक्षा में नकल करवाने के लिए अत्याधुनिक तरीकों का इस्तेमाल किया गया। इसमें स्याही मिटाने वाले पेन का प्रयोग किया जाता था, जिससे उत्तर पुस्तिकाओं में बाद में बदलाव किया जा सके।
स्याही मिटाकर दोबारा लिखी जाती थी उत्तरपुस्तिका
नकल माफिया परीक्षा के बाद उत्तरपुस्तिकाएं चोरी-छिपे विश्वविद्यालय से बाहर ले जाकर उनमें हेरफेर करते थे। बाहर से संशोधित उत्तर पुस्तिकाओं को वापस परीक्षा केंद्र में भेजा जाता था। हेयर ड्रायर की मदद से स्याही को मिटाकर सही उत्तर फिर से लिख दिए जाते थे, जिससे छात्रों को मनचाहे अंक दिलाए जा सकें।
कुलपति ने की सख्त कार्रवाई की पुष्टि
कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने जांच रिपोर्ट की पुष्टि करते हुए कहा कि परीक्षा में बड़े स्तर पर गड़बड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय इस तरह की धांधली को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। जांच रिपोर्ट और सभी आवश्यक दस्तावेज एफआईआर दर्ज कराने के लिए पुलिस को सौंप दिए गए हैं।