Haryana News हरियाणा में गुरुवार देर रात मौसम ने अचानक करवट ली। करनाल, पानीपत, कैथल और फतेहाबाद जिलों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश हुई और ओले गिरे। जींद और यमुनानगर में भी तेज वर्षा दर्ज की गई। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे में उत्तरी हरियाणा के कई हिस्सों में बूंदाबांदी की संभावना जताई है।

तेज हवाओं ने बढ़ाई किसानों की चिंता
मौसम में आए इस बदलाव से किसानों को मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली। जहां बारिश से फसलों को राहत मिली, वहीं तेज हवाओं ने चिंता बढ़ा दी। हवा की तेज गति के कारण कई स्थानों पर गेहूं की फसलें जमीन पर बिछ गईं, जिससे पैदावार पर असर पड़ सकता है।
किन-किन इलाकों में गिरे ओले?
- करनाल: असंध
- पानीपत: इसराना व मतलौडा
- कैथल: सीवन व राजौंद
- फतेहाबाद: कई हिस्सों में ओलावृष्टि
इसके अलावा, जींद और यमुनानगर में भारी वर्षा दर्ज की गई।
तापमान में गिरावट, अगले 24 घंटे में बूंदाबांदी की संभावना
मौसम विभाग के अनुसार, बारिश और ओलावृष्टि के कारण तापमान में करीब 2 डिग्री तक गिरावट आई है। वीरवार को अधिकतम तापमान 22.7 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि 4.4 मिमी बारिश हुई। दिनभर आसमान में बादल छाए रहे और 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, शुक्रवार को भी ऐसा ही मौसम बना रह सकता है।
मौसम परिवर्तन के पीछे क्या कारण?
मौसम विभाग के अनुसार, वर्तमान में पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में सक्रिय है। इसके अलावा, साइक्लोनिक सर्कुलेशन पश्चिमी राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों में पहुंच चुका है। इसका असर हरियाणा के उत्तरी हिस्सों में दिख रहा है, जिससे नमी बढ़ी है और तापमान में गिरावट आई है।
बारिश से राहत, लेकिन कटाई पर असर का डर
किसानों का कहना है कि लंबे समय से गेहूं की फसल को बारिश की जरूरत थी, क्योंकि जनवरी और फरवरी में तापमान काफी अधिक था। इससे यह डर था कि समय से पहले गर्मी बढ़ने से फसल खराब हो सकती है। हालांकि, बारिश से फसल को राहत तो मिली, लेकिन तेज हवाओं ने नई चिंता खड़ी कर दी है। हवा की रफ्तार अधिक रहने से फसलें गिर सकती हैं, जिससे कटाई में दिक्कतें आ सकती हैं और उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
अगले कुछ दिनों तक ऐसा ही रहेगा मौसम
मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक बादल छाए रहने और हल्की बूंदाबांदी की संभावना बनी रहेगी। किसानों को सलाह दी गई है कि वे फसलों की सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाएं और मौसम के अपडेट पर ध्यान दें।