HARYANA VRITANT

Haryana News पिछले साल फरवरी में पंजाब के किसान अपनी मांगों को लेकर दिल्ली कूच के लिए निकले थे, लेकिन हरियाणा के बॉर्डरों पर उन्हें रोक लिया गया। तब से किसान शंभू और खनौरी बॉर्डर पर डटे हुए हैं। इस आंदोलन के कारण देश की सबसे बड़ी विश्वकर्मा ट्रक मार्केट और आसपास की 400 एकड़ जमीन पर गहरा असर पड़ा है।

खनौरी बॉर्डर पर कारोबार ठप

पिछले एक साल से खनौरी बॉर्डर पर कारोबार पूरी तरह से प्रभावित हुआ है। विश्वकर्मा ट्रक मार्केट के कारोबारी दिनेश गोयल के अनुसार, इस आंदोलन के कारण कारोबारियों को करीब 150 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। पातड़ां से खनौरी तक लगभग सभी व्यापारिक गतिविधियाँ ठप हो गई हैं, जिसमें पेट्रोल पंप, मैरिज पैलेस, रेस्टोरेंट, होटल और छोटे कारोबार शामिल हैं।

आंदोलन का एक साल पूरा, गंभीर असर

13 फरवरी को किसान आंदोलन का एक साल पूरा होने जा रहा है। इस दौरान पातड़ां स्थित विश्वकर्मा ट्रक मार्केट और खनौरी बॉर्डर के आसपास की 400 एकड़ भूमि पर खेती भी प्रभावित हुई है। किसानों का कहना है कि हाईवे के बंद होने के कारण उनकी फसलें प्रभावित हो रही हैं। इसके साथ ही कई छोटे और बड़े कारोबार भी मंदी का शिकार हो गए हैं।

70 प्रतिशत कारोबार ठप पड़ा

विश्वकर्मा ट्रक मार्केट के कारोबारी दिनेश और मनीष गोयल का कहना है कि इस मार्केट का आकार दिल्ली और कोलकाता से भी बड़ा है। लेकिन आंदोलन के कारण यहां का 70 प्रतिशत कारोबार ठप पड़ा है। पातड़ां से अन्य राज्यों से आने वाले कारोबारी अब यहां नहीं आ पा रहे हैं, जिससे काम पूरी तरह से प्रभावित हुआ है।

मैरिज पैलेस और होटल व्यवसाय पर भी असर

धालीवाल पैलेस के संचालक दीवान का कहना है कि एक साल पहले उन्होंने 30 लाख रुपये में मैरिज पैलेस किराए पर लिया था, लेकिन अब बुकिंग में भारी गिरावट आई है। पिछले साल जो 60 से 70 बुकिंग हुआ करती थीं, अब वे 25 से 28 तक सिमट कर रह गई हैं।

खेती और स्थानीय व्यवसाय पर पड़ता असर

खनौरी के किसान अमरीक सिंह ढींढसा ने बताया कि उनकी 25 एकड़ जमीन पर आंदोलन का असर पड़ा है, जिसके कारण वे अगली गेहूं की फसल भी नहीं उगा पाए। इसके अलावा उनका शेलर भी प्रभावित हुआ है, जिससे उनकी आय में कमी आई है। आंदोलन ने आसपास की करीब 400 एकड़ कृषि भूमि को भी प्रभावित किया है।

पुलिस चौकसी और व्यापारिक गतिविधियों पर असर

पुलिस ने आंदोलन स्थल के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी है। कई गेस्ट हाउस, होटल, रेस्टोरेंट और छोटी दुकानों को बंद करवा दिया गया है, और कई विक्रेता अपनी दुकानें बंद कर घर चले गए हैं। इससे व्यापारिक गतिविधियाँ पूरी तरह से ठप हो गई हैं।