Haryana News हरियाणा विधानसभा सत्र के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और ऊर्जा मंत्री अनिल विज के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। बजट पर चर्चा के दौरान दोनों नेताओं के बीच बहस इतनी बढ़ गई कि स्पीकर को हस्तक्षेप कर माहौल शांत कराना पड़ा।

हुड्डा पर भड़के अनिल विज
विधानसभा में अनिल विज ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर निशाना साधते हुए कहा कि हुड्डा लोकतांत्रिक परंपराओं में विश्वास नहीं रखते। विज ने आरोप लगाया कि हुड्डा जब मुख्यमंत्री थे, तब भी किसी को बोलने नहीं देते थे और अब भी वही रवैया अपना रहे हैं। विज ने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि जिस व्यक्ति में तानाशाही प्रवृत्ति हो, उसका लोकतंत्र के मंदिर में क्या काम है?
बजट पर चर्चा के दौरान बढ़ा विवाद
गुरुवार को बजट सत्र के दौरान हुड्डा ने प्रदेश सरकार पर कर्ज बढ़ाने का आरोप लगाते हुए कहा, “कर्जा लो, घी पीओ और मरने के बाद कोई नहीं पूछेगा।” इस पर जब अनिल विज जवाब देने के लिए खड़े हुए तो हुड्डा ने नाराजगी जताते हुए कहा, “बैठ जाओ, बीच में मत बोलो।”
हुड्डा की इस टिप्पणी पर विज भड़क गए और कहा कि हुड्डा साहब बार-बार खर्चों और कर्जों की बात कर रहे हैं, लेकिन यह नहीं बता रहे कि किस क्षेत्र में खर्च कम किया जाए। सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि पैसा कहां से आएगा और कहां खर्च होगा।
स्पीकर को करना पड़ा हस्तक्षेप
हुड्डा ने विज पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर उनका यही रवैया रहा तो उन्हें हाउस में बोलने नहीं देंगे। इस पर विज ने और तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा, “स्पीकर साहब, यह अलोकतांत्रिक बयान है। जब हुड्डा मुख्यमंत्री थे, तब भी किसी को बोलने नहीं देते थे। मैं जनता से चुनकर आया हूं, पांच साल तक बोलूंगा और आप की जान खाऊंगा।”
हुड्डा और विज की इस बहस के बीच कांग्रेस विधायक कुलदीप वत्स भी बोलने लगे, लेकिन स्पीकर ने हाउस का डेकोरम बनाए रखने के लिए उन्हें रोक दिया।
अन्य मंत्रियों से भी हुई नोकझोंक
सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल बजट पर चर्चा कर रही थीं, तभी पंचायत मंत्री कृष्णलाल पंवार शिक्षा बजट से जुड़े आंकड़े रखने लगे। इस पर हुड्डा ने चुटकी लेते हुए कहा कि मंत्री कृष्णलाल पंवार और मंत्री कृष्ण बेदी को हर विषय पर खड़ा होना जरूरी लगता है। इस टिप्पणी पर मंत्री कृष्ण बेदी ने विरोध जताया और कहा कि वह बेवजह खड़े नहीं होते। हुड्डा ने सफाई दी कि उनकी यह टिप्पणी किसी खास दिन को लेकर नहीं थी।
विधानसभा में इस तरह की तीखी बहसों से माहौल गर्म हो गया, लेकिन स्पीकर के हस्तक्षेप के बाद स्थिति को संभाला गया।