HARYANA VRITANT

Haryana News हरियाणा विधानसभा के प्रश्नकाल में स्वास्थ्य मंत्री आरती राव द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों ने प्रदेश में नशे की भयावह स्थिति उजागर कर दी। पिछले पांच वर्षों में 1,84,068 युवा नशे की लत से छुटकारा पाने के लिए सरकारी और निजी नशामुक्ति केंद्रों में इलाज कराने पहुंचे। इनमें से केवल 50,628 युवा ही पूरी तरह ठीक हो सके, यानी सिर्फ 27% युवाओं ने नशे से मुक्ति पाई।

विधायक अर्जुन चौटाला ने उठाए सवाल

इनेलो नेता व रानियां से विधायक अर्जुन चौटाला ने विधानसभा में यह सवाल उठाया कि –

  • हरियाणा में नशे की चपेट में आए युवाओं की कुल संख्या कितनी है?
  • जिलावार सरकारी नशामुक्ति केंद्रों की संख्या और उनकी क्षमता कितनी है?
  • बीते पांच वर्षों में नशामुक्त युवाओं की संख्या कितनी रही?
  • सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाए हैं?

स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने जवाब में बताया कि अप्रैल 2024 से 18 मार्च 2025 तक 50,207 युवा नशामुक्ति केंद्रों की ओपीडी और आईपीडी में पहुंचे हैं। प्रदेश में कुल 30 सरकारी नशामुक्ति केंद्र हैं, लेकिन इनकी कुल बेड क्षमता मात्र 460 ही है।

प्रदेश में खुलेंगे 46 नए नशामुक्ति केंद्र

विधायक अर्जुन चौटाला ने सरकार से यह भी पूछा कि –

  • नशामुक्ति केंद्रों को चलाने का प्रोटोकॉल क्या है?
  • किस आधार पर नशे से पूरी तरह मुक्त माना जाता है?
  • गांवों को नशामुक्त घोषित करने की प्रक्रिया क्या है – ग्रामवासियों की सहमति से या सरकारी दबाव में?

इस पर स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने कहा कि जल्द ही प्रदेश में 46 नए नशामुक्ति केंद्र खोले जाएंगे। उन्होंने बताया कि नशामुक्ति केंद्रों का नोडल ऑफिसर समाज कल्याण विभाग होता है, जबकि स्वास्थ्य विभाग केवल सुविधाएं प्रदान करता है।

मिलकर काम करने पर ही मिलेगी सफलता – अरविंद शर्मा

इस विषय पर मंत्री अरविंद शर्मा ने भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि गोहाना में “चिंता का विषय” कार्यक्रम शुरू करके यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि नशा कहां से आ रहा है। सरकार और प्रशासन इस मुद्दे पर काम कर रहे हैं, लेकिन समाज के सभी वर्गों के सहयोग के बिना इसे खत्म करना संभव नहीं।