HARYANA VRITANT

Gurugram Mayor Election गुरुग्राम नगर निगम चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। जिला प्रशासन ने मतदाता सूची फाइनल कर दी है, और चुनाव में हिस्सा लेने वाले दावेदार भी सामने आ रहे हैं। मेयर पद के लिए महिला बीसीए आरक्षण लागू होने के बाद कांग्रेस पार्टी के कई नेताओं ने अपनी रणनीति बदली है।

आरक्षण के बाद कांग्रेस नेताओं ने बदली रणनीति

गुरुग्राम मेयर की सीट महिला बीसीए के लिए आरक्षित होने से कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने पार्षद पद के चुनाव लड़ने की घोषणा की है। आरक्षण से पहले ये नेता मेयर पद के लिए तैयारियां कर रहे थे।

सुखबीर कटारिया के बेटे निशित कटारिया पार्षदी के मैदान में

पूर्व मंत्री सुखबीर कटारिया के बेटे और गुरुग्राम यूथ कांग्रेस के जिलाध्यक्ष निशित कटारिया ने पहले मेयर पद के लिए दावेदारी पेश की थी। हालांकि, सीट आरक्षित होने के बाद उन्होंने वार्ड 36 से पार्षद पद का चुनाव लड़ने का निर्णय लिया।
सोमवार को उनके आवास पर क्षेत्र के लोगों की पंचायत हुई, जहां लोगों ने उन्हें चुनाव लड़ने का समर्थन दिया। इस अवसर पर सुखबीर कटारिया ने कहा कि उनका बेटा गुरुग्राम के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और पार्षद के माध्यम से जनता की सेवा करेगा।

नरेश सहरावत ने भी मेयर की दावेदारी छोड़ी

कांग्रेस नेता नरेश सहरावत, जो 2000 में सुखराली के सरपंच रह चुके हैं, मेयर पद के लिए तैयारी कर रहे थे। 2010 और 2019 में पार्षद चुनाव लड़ चुके सहरावत ने सीट आरक्षित होने के बाद वार्ड 25 से पार्षद चुनाव लड़ने का फैसला किया।

धान सिंह तंवर ने भी बदल लिया रुख

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और किसान धान सिंह तंवर, जो पिछले 30 वर्षों से सक्रिय राजनीति में हैं, ने भी मेयर चुनाव की योजना बनाई थी। विधानसभा चुनाव में सोहना से टिकट न मिलने के बाद उन्होंने गुरुग्राम से मेयर पद के लिए तैयारी शुरू की थी। लेकिन सीट महिला आरक्षित होने के कारण अब वह वार्ड 14 से पार्षद पद का चुनाव लड़ेंगे।

पार्षदों में बढ़ेगी डिप्टी मेयर की दौड़

मेयर सीट महिला बीसीए के लिए आरक्षित होने से अब पार्षदों के बीच डिप्टी मेयर और सीनियर डिप्टी मेयर बनने की दौड़ तेज हो गई है। चुनाव में यह नई भूमिका कांग्रेस नेताओं के लिए अहम हो सकती है।

निष्कर्ष

गुरुग्राम नगर निगम चुनाव में आरक्षण ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। कांग्रेस के बड़े नेता अब मेयर पद से हटकर पार्षद पद की ओर रुख कर रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि नई रणनीति में कांग्रेस के दावेदार कितनी सफलता प्राप्त करते हैं।