Fatehabad Police पुलिस अधीक्षक सिद्धांत जैन, आईपीएस ने जिलावासियों को सतर्क करते हुए कहा कि डिजिटल क्रांति के इस दौर में जहाँ तकनीक ने जीवन को आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने भी अपनी चालबाज़ियों को अत्याधुनिक रूप दे दिया है। हाल के दिनों में जिस साइबर अपराध ने सबसे चिंताजनक रूप धारण किया है, वह है ब्रांड इम्पर्सोनेशन फ्रॉड—एक ऐसा संगठित जाल जिसमें अपराधी प्रतिष्ठित ब्रांडों, बैंकों, सरकारी संस्थाओं और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों की पहचान चुराकर नागरिकों को ठगने का प्रयास करते हैं।

उन्होंने बताया कि इस फ्रॉड की सबसे खतरनाक विशेषता यह है कि ठग स्वयं को इतना विश्वसनीय और पेशेवर तरीके से प्रस्तुत करते हैं कि आम नागरिक बिना किसी शक के उनकी बातों पर विश्वास कर लेते हैं। अपराधी न केवल असली लोगो, रंग-रूप और भाषा की नकल करते हैं बल्कि ऐसा आभास पैदा करते हैं कि संचार वास्तव में किसी प्रतिष्ठित संस्था की ओर से ही हो। इसी कारण कई नागरिक अनजाने में अपनी निजी, संवेदनशील और वित्तीय जानकारी उनके हवाले कर बैठते हैं।
एसपी जैन ने आगे बताया कि ब्रांड इम्पर्सोनेशन फ्रॉड में साइबर जालसाज़ फर्जी वेबसाइट, नकली मोबाइल ऐप, भ्रामक ई-मेल, व्हाट्सएप संदेश और SMS के माध्यम से लोगों तक पहुँचते हैं। वे आधिकारिक संस्थानों से मेल खाते नाम और लोगोज़ का उपयोग कर भरोसा जीतते हैं। अनेक मामलों में पाया गया है कि ये अपराधी अग्रणी बैंकों, नामी कंपनियों और सरकारी सेवाओं के नाम पर OTP, बैंक विवरण, डेबिट/क्रेडिट कार्ड जानकारी और निजी डेटा चुरा लेते हैं।
उन्होंने कहा कि अपराधी कई तकनीकों का संयोजन कर अपनी ठगी को अंजाम देते हैं। कुछ ठग असली वेबसाइट जैसी दिखने वाली फर्जी साइटें बनाकर लिंक भेजते हैं, जिन पर क्लिक करते ही उपयोगकर्ता की संवेदनशील जानकारी चोरी हो जाती है। कई मामलों में स्कैमर्स नकली मोबाइल ऐप डाउनलोड करवाते हैं, जिनमें स्पाइवेयर या डेटा चोरी करने वाला मैलवेयर छिपा होता है। “KYC अपडेट”, “खाता ब्लॉक”, “इनाम जीतने” या “ऑफ़र खत्म होने” जैसे संदेश भेजकर लोगों को भ्रमित किया जाता है। वहीं कई ठग खुद को कंपनी का कस्टमर केयर अधिकारी बताकर सीधे फोन करते हैं और नागरिकों से गोपनीय जानकारी निकलवा लेते हैं।
SP की अपील: खतरा टला नहीं, सतर्क रहें! Fatehabad Police
उन्होंने कहा कि किसी भी लिंक या URL पर क्लिक करने से पहले उसकी सावधानीपूर्वक जांच करना आवश्यक है, क्योंकि फर्जी साइटों में अक्सर स्पेलिंग, डोमेन नाम या डिज़ाइन में मामूली अंतर होता है। मोबाइल एप्लिकेशन हमेशा आधिकारिक ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करें। किसी भी ई-मेल, SMS या कॉल में मांगे गए OTP, पासवर्ड, बैंक विवरण या कार्ड जानकारी किसी भी परिस्थिति में साझा न करें। कस्टमर केयर नंबर इंटरनेट पर खोजने के बजाय संबंधित संस्था की आधिकारिक वेबसाइट से ही प्राप्त करें। यदि कोई इनाम, ऑफर या निवेश योजना असामान्य रूप से आकर्षक लगे तो उसे संदेह के दायरे में रखें। मोबाइल एवं कंप्यूटर की सुरक्षा सेटिंग्स अपडेट रखें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि के मामले में तुरंत बैंक को सूचित कर पासवर्ड बदलें।
अंत में, पुलिस अधीक्षक श्री सिद्धांत जैन, आईपीएस* ने कहा कि साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी उपायों से नहीं, बल्कि नागरिकों की जागरूकता और सतर्कता से ही सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने जिलावासियों से अपील की कि किसी भी संदिग्ध संदेश, कॉल या लिंक पर भरोसा न करें तथा स्वयं और अपने परिवार को साइबर अपराध से सुरक्षित रखने हेतु हर समय सजग रहें।