दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में छात्रसंघ द्वारा घोषित मार्च के बाद गुरुवार को कैंपस के बाहर तनावपूर्ण स्थिति बन गई। विश्वविद्यालय परिसर से शिक्षा मंत्रालय तक लॉग मार्च निकालने की घोषणा के साथ ही बड़ी संख्या में छात्र एकत्र हुए और जैसे ही वे कैंपस से बाहर निकलने लगे तो दिल्ली पुलिस के साथ उनकी झड़प हो गई। इस घटना में 25 पुलिसकर्मियों के घायल होने की जानकारी सामने आई है जबकि पुलिस ने 14 छात्रों को हिरासत में लिया है।

जानकारी के अनुसार यह विरोध प्रदर्शन पिछले कुछ दिनों से विश्वविद्यालय परिसर में जारी था। छात्रसंघ ने वाइस चांसलर संतिश्री धुलिपुडी पंडित के एक बयान को लेकर आपत्ति जताई थी जिसके बाद आंदोलन तेज हो गया। छात्रसंघ की ओर से शिक्षा मंत्रालय तक मार्च निकालने का ऐलान किया गया था। प्रशासन की ओर से छात्रों को परिसर के बाहर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी और मार्च को विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित रखने को कहा गया था।
गुरुवार को सैकड़ों छात्र निर्धारित कार्यक्रम के तहत गेट की ओर बढ़े। जैसे ही उन्होंने कैंपस से बाहर निकलने का प्रयास किया पुलिस ने उन्हें मुख्य द्वार पर रोक लिया। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच धक्का मुक्की और झड़प की स्थिति बन गई। छात्रों ने पुलिस पर बल प्रयोग का आरोप लगाया है जबकि पुलिस का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।


घायल पुलिसकर्मियों में थाना किशनगढ़ के एसएचओ भी शामिल बताए जा रहे हैं जिन्हें उपचार के लिए सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल की तैनाती की गई थी। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
पुलिस ने जिन छात्रों को गिरफ्तार किया है उनमें नीतीश कुमार, अदिति मिश्रा, गोपिका बाबू, दानिश अली शामिल हैं। ये सभी छात्रसंघ से जुड़े पदाधिकारी बताए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि विधि व्यवस्था भंग करने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में कार्रवाई की गई है।


विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अब तक औपचारिक विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है लेकिन सोर्सेज के अनुसार प्रशासन पहले ही स्पष्ट कर चुका था कि कैंपस के बाहर मार्च की अनुमति नहीं है। फिलहाल परिसर और आसपास के क्षेत्र में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है और आगे किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए निगरानी बढ़ा दी गई है।

यह घटनाक्रम एक बार फिर विश्वविद्यालय परिसर में छात्र राजनीति और प्रशासन के बीच टकराव के मुद्दे को राष्ट्रीय चर्चा में ले आया है। आने वाले दिनों में इस मामले में पुलिस और प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।