Bahadurgarh News बहादुरगढ़ में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जहां जिंदा व्यक्ति अपने जायज हक के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है, लेकिन 25 साल पहले मरा हुआ व्यक्ति तहसील में हाजिर होकर प्लॉट की रजिस्ट्री करवा देता है। इस फर्जीवाड़े का खुलासा पूर्व नगर पार्षद वजीर राठी ने किया है।

मृत व्यक्ति के नाम पर कैसे हो गई रजिस्ट्री?
फ्रेंड्स कॉलोनी गली नंबर-5 में 190 गज के एक प्लॉट का विवाद सामने आया है। यह प्लॉट 1987 में श्रीराम नामक व्यक्ति ने खरीदा था। श्रीराम ने 1999 में अपने भतीजे प्रेमचंद के बेटे ललित मोहन के नाम वसीयत कर दी, लेकिन यह वसीयत सिर्फ नोटरी से अटेस्टेड थी, रजिस्टर्ड नहीं।
श्रीराम की अक्टूबर 1999 में मृत्यु हो गई। ललित मोहन ने कोर्ट में वसीयत को मान्यता देने के लिए याचिका दायर की, जिस पर दिसंबर 2024 में कोर्ट ने उनके पक्ष में डिक्री जारी कर दी। इसके आधार पर 18 फरवरी 2025 को ललित मोहन ने तहसीलदार से प्लॉट का इंतकाल अपने नाम कराने के लिए आवेदन दिया, जिसे तहसीलदार ने मंजूरी देने के बजाय रजिस्ट्रेशन फीस भरने की शर्त लगा दी।
इसी मौके का फायदा उठाकर 10 मार्च 2025 को उसी मृतक श्रीराम को ‘जिंदा’ दिखाकर किसी अन्य व्यक्ति हर्षपाल (दिल्ली निवासी) के नाम रजिस्ट्री कर दी गई।
नगर परिषद की लापरवाही से हुआ खेल
इस धोखाधड़ी का एक और बड़ा पहलू नगर परिषद से जुड़ा है।
- नगर परिषद के रिकॉर्ड में प्लॉट का मालिक अब भी श्रीराम था, लेकिन उसके मोबाइल नंबर की जगह किसी और का नंबर दर्ज था।
- 14 फरवरी को ललित मोहन ने समाधान शिविर में इस गलत नंबर को ठीक कराने की अर्जी दी, लेकिन नगर परिषद ने इसे विवादित बताकर आवेदन रद्द कर दिया।
- 19 फरवरी को उसी गलत नंबर का इस्तेमाल कर प्लॉट की एनओसी निकलवाई गई और फर्जी रजिस्ट्री कर दी गई।
- इस रजिस्ट्री में गवाह के तौर पर दिल्ली के सोनू और स्थानीय नंबरदार हवासिंह का नाम शामिल है।
जांच और कार्रवाई के निर्देश
पूर्व पार्षद वजीर सिंह ने इस धोखाधड़ी के लिए एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। मामला सामने आने के बाद एसडीएम ने तहसील अधिकारियों को दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही, विवादित रजिस्ट्री को भी रद्द कर दिया गया है।
सरकारी तंत्र की लापरवाही से हुआ फर्जीवाड़ा!
अगर समय रहते ललित मोहन के नाम इंतकाल दर्ज हो जाता और नगर परिषद मोबाइल नंबर ठीक कर देती, तो यह धोखाधड़ी नहीं होती। लेकिन सरकारी विभागों की लापरवाही ने एक ठग को बड़ा फर्जीवाड़ा करने का मौका दे दिया। अब देखना यह होगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।