HARYANA VRITANT

Ayushman Yojana हरियाणा में आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों का इलाज कर रहे निजी अस्पतालों को अब तक 450 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया गया है। इस देरी को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) हरियाणा ने दो फरवरी तक बकाया राशि का भुगतान नहीं होने पर तीन फरवरी से इलाज बंद करने की चेतावनी दी थी। हालांकि, सोमवार शाम को सरकार के साथ बैठक में कुछ मांगों पर सहमति बनी, लेकिन देर रात आईएमए कार्यकारिणी ने रुख बदल लिया।

आज दोपहर से इलाज ठप

आईएमए हरियाणा की कार्यकारिणी की देर रात हुई ऑनलाइन बैठक में फैसला लिया गया कि आज दोपहर 12 बजे से निजी अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत इलाज बंद कर देंगे। इससे पहले, चंडीगढ़ में सरकार और आईएमए प्रतिनिधियों की बैठक में 31 मार्च तक भुगतान किए जाने को लेकर सहमति बनी थी, लेकिन डॉक्टर अब तत्काल बकाया राशि की मांग कर रहे हैं।

मुख्य प्रधान सचिव के साथ बैठक में बनी थी सहमति

सोमवार को मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर के साथ तीन घंटे तक चली बैठक में सरकार ने आश्वासन दिया था कि 10 मार्च तक लंबित बिलों का भुगतान 31 मार्च तक कर दिया जाएगा। साथ ही अगले वित्त वर्ष में 2500 करोड़ रुपये का बजट अलग से रखा जाएगा। सरकार ने 28 फरवरी तक सभी लंबित क्लेम के निपटारे का वादा किया था।

शाम की बैठक में बनी थी सहमति, रात में बदला फैसला

बैठक के दौरान निम्नलिखित बिंदुओं पर सहमति बनी थी:

  • मेडिसिन व बाल चिकित्सा संबंधी क्लेम विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा जांचे जाएंगे।
  • क्लेम में कटौती की स्थिति में अस्पताल को विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
  • मरीज को आयुष्मान योजना के तहत इलाज न करवाने की स्थिति में स्वयं खर्च वहन करने का विकल्प दिया जाएगा।
  • अस्पतालों को क्लेम राशि के लिए दूसरी अपील का विकल्प मिलेगा, जिससे समय पर भुगतान सुनिश्चित हो सके।

हालांकि, आईएमए कार्यकारिणी ने रात में फैसला बदलते हुए स्पष्ट किया कि जब तक बकाया राशि नहीं मिलती, तब तक इलाज नहीं होगा।

सरकारी अस्पतालों पर बढ़ेगा दबाव

निजी अस्पतालों द्वारा इलाज बंद किए जाने से सरकारी अस्पतालों पर बोझ बढ़ने की आशंका है। अंबाला कैंट और सिटी के सरकारी अस्पतालों में पहले ही 2000-2500 मरीजों की ओपीडी होती है, जो अब और बढ़ सकती है।

आईएमए का आरोप: भुगतान में देरी, कटौती से अस्पताल संचालक परेशान

आईएमए के पूर्व प्रधान अशोक सारवाल का कहना है कि नियमानुसार अस्पतालों को 15 दिनों में भुगतान होना चाहिए, लेकिन इसमें लगातार देरी हो रही है। यहां तक कि भुगतान में भी कटौती की जा रही है, जिससे अस्पतालों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।

केवल 20% भुगतान हुआ, लाखों रुपये बकाया

आईएमए अंबाला के प्रधान डॉ. विवेक मल्होत्रा ने बताया कि अब तक अस्पतालों को सिर्फ 20-25% भुगतान ही मिला है, जबकि लाखों रुपये के बिल अभी भी बकाया हैं। इस कारण आईएमए ने उपचार बंद करने का फैसला लिया है।

अब देखना होगा कि सरकार इस विवाद को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाती है और क्या निजी अस्पताल दोबारा आयुष्मान योजना के तहत इलाज शुरू करेंगे।