Ambala Mayor Election अंबाला मेयर उपचुनाव में कांग्रेस की अमीषा चावला ने नामांकन दाखिल किया है। इस बार भाजपा, इनेलो, जजपा, बसपा और आम आदमी पार्टी सहित किसी भी दल ने अपना प्रत्याशी नहीं उतारा। पिछले चुनाव में जहां पांच प्रत्याशी मैदान में थे, वहीं इस बार कांग्रेस की उम्मीदवार अकेली हैं।

अन्य दलों ने क्यों खींचे हाथ?
मेयर पद के लिए किसी भी अन्य दल ने रुचि नहीं दिखाई। भाजपा, जिसके पास नगर निगम में 14 पार्षद हैं, ने भी उम्मीदवार नहीं उतारा। इनेलो, जजपा, बसपा और आम आदमी पार्टी के नेता भी चुनावी मैदान से नदारद रहे।
पिछले चुनाव में थी कड़ी टक्कर
27 दिसंबर 2020 को हुए पिछले चुनाव में भाजपा की डॉ. वंदना शर्मा और हरियाणा जनचेतना पार्टी की शक्तिरानी शर्मा के बीच सीधी टक्कर थी। शक्तिरानी शर्मा ने 8,000 से अधिक वोटों से जीत दर्ज की थी। कांग्रेस की मीना अग्रवाल चौथे स्थान पर रही थीं, जबकि इस बार की उम्मीदवार अमीषा चावला ने उस समय हरियाणा डेमोक्रेटिक फ्रंट से चुनाव लड़ते हुए तीसरा स्थान हासिल किया था।
भाजपा का मजबूत गढ़, कांग्रेस की चुनौती
नगर निगम के 20 वार्डों में भाजपा के पास 14 पार्षद और दो मनोनीत पार्षद हैं, जबकि कांग्रेस के पास मात्र 5 पार्षद हैं। भाजपा की स्थिति मजबूत मानी जा रही है, विशेष रूप से शक्तिरानी शर्मा के भाजपा में आने से पार्टी को और बढ़त मिली है।
पहला चुनाव और मेयर का सफर
2013 में जब अंबाला शहर और छावनी का संयुक्त नगर निगम बना, तब रमेश मल को पहली बार मेयर चुना गया। उस समय मेयर का सीधा चुनाव नहीं होता था। 2020 में पहली बार यह सीट महिलाओं के लिए आरक्षित हुई थी, जिसमें शक्तिरानी शर्मा ने भाजपा की उम्मीदवार को हराकर जीत दर्ज की थी।
कांग्रेस में उत्साह की कमी?
हालांकि, शहर में कांग्रेस का विधायक है, फिर भी पार्टी में चुनाव को लेकर उत्साह नहीं दिखा। कांग्रेस से कोई इच्छुक उम्मीदवार सामने नहीं आया। बताया जा रहा है कि अमीषा चावला ने भी पार्टी नेता दीपेंद्र हुड्डा के फोन के बाद ही नामांकन दाखिल किया। वहीं, भाजपा से 21 लोगों ने टिकट की मांग की थी। कांग्रेस में इस उदासीनता ने कार्यकर्ताओं के उत्साह को भी ठंडा कर दिया।