खबर का सार: NIT Kurukshetra में बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है, जहां निदेशक प्रो. बी.आर. रमना रेड्डी का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। मंत्रालय की जांच और शक्तियां वापस लेने के बाद यह फैसला लिया गया। फिलहाल वरिष्ठ प्रोफेसर प्रो. ब्रह्मजीत को कार्यकारी निदेशक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अब संस्थान में नियमित निदेशक की नियुक्ति निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जाएगी।
NIT Kurukshetra: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान में पूर्व कुलसचिव के निलंबित करने के बाद अब निदेशक का इस्तीफा भी मंजूर कर लिया है। निदेशक प्रो. बीआर रमना रेड्डी का इस्तीफा मंजूर होते ही अब NIT Kurukshetra को अगला नियमित निदेशक लंबी प्रकिया से गुजरने के बाद ही मिलेगा।

नए निदेशक की नियुक्ति के लिए NIT के ही वरिष्ठ प्रो. ब्रह्मजीत को कार्यकारी निदेशक बनाया है। आमतौर पर किसी भी एनआइटी में नियमित निदेशक न होने पर मंत्रालय की प्रेक्टिस किसी साथ लगते संस्थान के निदेशक को कार्यकारी निदेशक की जिम्मेदारी सौंपने की रहती है।
एनआइटी कुरुक्षेत्र के लिए भी पंजाब के जालंधर एनआइटी और दिल्ली एनआइटी निदेशक से संपर्क किया था। वहीं उत्तराखंड में एनआइटी निदेशक का पद पहले ही खाली पड़ा है। इन निदेशकों की ओर से हालात को देखते हुए इंकार करने के बाद मंत्रालय ने एनआइटी के ही प्रो. ब्रह्मजीत को कार्यकारी निदेशक नियुक्त कर दिया है।
इस्तीफे के बाद प्रशासनिक बदलाव तेज, NIT Kurukshetra में नई नियुक्ति लागू
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से 29 मार्च को एनआइटी निदेशक प्रो. बीवी रमना रेड्डी की प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों पर रोक लगा दी थी। इस रोक के बाद NIT Kurukshetra कुलसचिव प्रो. ब्रह्मजीत को बदलकर उनकी जगह प्रो. विनोद मित्तल को तुरंत प्रभाव से कुलसचिव बनाया।

इसके बाद से ही प्रो. ब्रह्मजीत को अधिकारिक रूप से निदेशक की शक्तियां सौंपने की बातें कही जा रही थी। हालांकि वह लगातार कामकाज देख भी रहे थे और निदेशक की जिम्मेदारी निभा रहे थे। अब शनिवार देर रात से उन्हें कार्यकारी निदेशक नियुक्त कर दिया गया है।
29 मार्च को प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियां वापस लिए जाने के बाद निदेशक प्रो. बीवी रमना रेड्डी ने तीन अप्रैल को ही इस्तीफा दे दिया था। अब मंत्रालय की ओर से गठित टीम की जांच पूरी होने के बाद शनिवार देर रात उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया है। उनकी नियुक्ति छह फरवरी 2022 को पांच साल के लिए की थी। अभी उनके कार्यकाल का 10 माह के करीब बकाया था।
अब एनआइटी में नया निदेशक नियुक्त करने के लिए प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसमें मंत्रालय की ओर से नियमित निदेशक के लिए आवेदन मांगे जाएंगे। इसके बाद कमेटी बनेगी और प्रक्रिया पूरी करने के बाद इस फाइल पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री और देश की राष्ट्रपति के भी हस्ताक्षर होंगे।
अभी तक 60 विद्यार्थियों की मौत के मामले में जांच जारी है। इसके बाद से 18 अप्रैल से ही एनआइटी परिसर खाली पड़ा है। अभी एनआइटी प्रशासन की ओर से जारी आदेशों के चलते अनिश्चितकालीन छुट्टियां चल रही हैं। बढ़ती आत्महत्याओं के चलते परीक्षाओं को भी स्थगित कर दिया गया है।