घर बिकने और पति द्वारा छोड़े जाने के बाद भी हार नहीं मानी, पैरा शॉट पुट में देश का नाम रोशन किया

हरियाणा के रेवाड़ी की शर्मिला धनखड़ ने कॉमनवेल्थ गेम्स में पैरा शॉट पुट स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। उनकी यह जीत केवल खेल की उपलब्धि नहीं है, बल्कि जीवन में आई कठिनाइयों के खिलाफ लड़ाई का प्रतीक है।

शर्मिला का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। आर्थिक तंगी के कारण उनका घर बिक गया और पति ने भी साथ छोड़ दिया। इन विषम परिस्थितियों में भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। वह हरियाणा रोडवेज में पहली महिला कंडक्टर बनीं और अपने परिवार का भरण-पोषण किया।

खेल के प्रति उनका जुनून कभी कम नहीं हुआ। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने पैरा एथलेटिक्स में प्रशिक्षण जारी रखा। उनकी मेहनत और दृढ़ संकल्प ने आखिरकार रंग लाया जब उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता।

शर्मिला धनखड़ की यह उपलब्धि न केवल हरियाणा बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है। उनकी कहानी हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो जीवन की चुनौतियों से जूझ रहा है। उन्होंने साबित कर दिया कि दृढ़ निश्चय और मेहनत से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।