जिंदल परिवार ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को हिसार में लाकर अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने का काम किया। अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में देश के दूसरे सबसे कद्दावर राजनेता से महाराजा अग्रसेन की प्रतिमा का अनावरण करवाकर अग्रवाल समाज में अपनी पैठ बढ़ाने का काम किया। साथ ही अपने राजनीतिक विरोधियाें को करारा जवाब दिया।

दूसरी ओर गृहमंत्री अमित शाह ने पूर्व सीएम मनोहरलाल और सीएम नायब सिंह सैनी की तारीफ कर संदेश दिया कि प्रदेश के मुखिया की अनदेखी नहीं हो सकती है। प्रदेश के मुखिया की सहमति से ही काम होंगे। मेडिकल कॉलेज में कैंसर अस्पताल खोलने पर सीएम और गृहमंत्री अमित शाह दोनों ने ही चुप्पी साध ली।
जिंदल घराने का प्रदेश सरकार में वजूद बढ़ा
पहले कुरुक्षेत्र से नवीन जिंदल ने सांसद बनकर जिंदल परिवार की राजनीतिक ताकत को मजबूत किया। इसके बाद हिसार में उनकी मां सावित्री जिंदल के विधायक चुने जाने से जिंदल घराने का प्रदेश सरकार में भी वजूद बढ़ा। निर्दलीय विधायक सावित्री जिंदल ने बिना किसी शर्त सरकार को समर्थन देने का एलान किया। उन्हें मंत्री बनाने के लिए भी काफी प्रयास किए गए। नगर निगम चुनाव आते आते मेयर की टिकट के लिए सावित्री और भाजपाइयों में टकराव बढ़ गया।
अब जिंदल परिवार ने अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को अग्रोहा मेडिकल कॉलेज के कार्यक्रम में बुला कर अपनी सियासी मजबूती दिखाई। इसके पीछे का उद्देश्य पिछले तीन साल से अटके कैंसर अस्पताल के प्रोजेक्ट को गति दिलाना भी था। नवीन जिंदल ने अपने धन्यवाद भाषण में भी जिक्र किया कि अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में कैंसर अस्पताल बनाने का लक्ष्य है। हालांकि सीएम नायब सिंह सैनी और केंद्रीय गृह मंत्री अने इस मामले में चुप्पी साधे रखी।
अमित शाह ने अग्रवाल समाज, महाराजा अग्रसेन की तारीफ करने के साथ साथ स्वर्गीय ओपी जिंदल की दूरदर्शिता की सराहना की,लेकिन नवीन जिंदल व सावित्री जिंदल को खास तरजीह नहीं दी। पूर्व सीएम मनोहरलाल की नीतियों को सराहा और सीएम नायब सिंह सैनी के कार्याें पर भी मोहर लगाने का काम किया। उन्होंने साफ संदेश दिया कि प्रदेश में सभी को सीएम के साथ मिलकर ही काम करना होगा।
डॉ. कमल गुप्ता के साथ खींचतान
विधायक सावित्री जिंदल के साथ डॉ. कमल गुप्ता की विधानसभा चुनाव में टिकट से पहले ही खींचतान शुरू हो गई थी। डॉ. गुप्ता को टिकट मिली और सावित्री जिंदल ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा तो दूरियां बढ़ती चली गईं। गुप्ता ने सावित्री जिंदल को महारानी कहकर उन पर जुबानी हमला किया। इसके बाद से दोनों ने एक साथ मंच साझा नहीं किया है।
जिंदल परिवार हिसार में चाह रहा ताकत
जिंदल परिवार हिसार में भाजपा का चेहरा बनना चाहता है। दूसरी ओर डॉ. कमल गुप्ता नहीं चाहते हैं निर्दलीय विधायक भाजपा का चेहरा बनें। जिंदल परिवार ने विधानसभा चुनाव में काम कराने के नाम पर वोट मांगे हैं। उन्हें राजनीतिक ताकत नहीं मिलेगी तो लोगों के काम नहीं करा सकेंगे। काम नहीं करा पाएंगे तो लोगों के विरोध का भी सामना करना पड़ सकता है।