Jaguar Crash अंबाला एयरबेस देश का सबसे पुराना और बड़ा एयरफोर्स स्टेशन है। इसने 1965 और 1971 की लड़ाइयों में अहम भूमिका निभाई थी। यहां पहले मिग और जगुआर विमानों की स्क्वाड्रन तैनात थीं। हालांकि, कुछ साल पहले भारतीय वायुसेना ने सभी जगुआर विमानों को राजस्थान शिफ्ट कर दिया, जहां इनका उपयोग प्रशिक्षण के लिए किया जा रहा था।

तकनीकी रूप से ‘पुअर’ घोषित जगुआर को मिली उड़ान की अनुमति
क्रैश हुआ जगुआर पहले ही तकनीकी जांच में ‘पुअर’ रिपोर्ट हो चुका था। इसके बावजूद इसे राजस्थान के ट्रेनिंग एयरबेस से लॉन्ग फ्लाइंग जोन के लिए हरी झंडी दी गई। जब इसने अंबाला एयरबेस पर हॉल्ट किया, तो इंजन में एरर सामने आया था, लेकिन फिर भी इसे उड़ान भरने की अनुमति दे दी गई।
उड़ान के कुछ मिनटों बाद ही हुआ हादसा
7 मार्च को पायलट नवीन रेड्डी ने राजस्थान से जगुआर में प्रशिक्षण उड़ान भरी। अंबाला एयरबेस पर ईंधन भरने और मामूली जांच के बाद विमान ने उड़ान भरी, लेकिन कुछ ही मिनटों में मोरनी की पहाड़ियों में क्रैश हो गया। इसके बाद वायुसेना मुख्यालय ने मामले की जांच के लिए कोर्ट कमेटी गठित की।

इंजन फेल होने से हुआ हादसा
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि विमान के एडोर एमके-811 इंजन में खराबी थी, जिसके कारण यह दुर्घटनाग्रस्त हुआ। हाल ही में इसकी तकनीकी जांच भी हुई थी, जिसमें कई कमियां सामने आई थीं, लेकिन उन्हें दूर कर दिया गया था। बावजूद इसके, उड़ान के दौरान इंजन फेल हो गया और हादसा हो गया।
सर्विसिंग और परिचालन डाटा की हो रही जांच
वायुसेना अधिकारियों ने क्रैश हुए जगुआर के रखरखाव और हाल की सर्विसिंग का रिकॉर्ड तलब किया है। कोर्ट कमेटी उड़ान पथ, मौसम और पायलट रिपोर्ट सहित अन्य परिचालन डाटा की जांच कर रही है। पायलट से भी विस्तृत पूछताछ की गई है।

मानवीय त्रुटि नहीं, तकनीकी खामी बनी वजह
पायलट के सुरक्षित इजेक्शन और लैंडिंग के चलते इस हादसे में किसी मानवीय त्रुटि की आशंका नहीं जताई गई है। जांच में यह स्पष्ट हो रहा है कि दुर्घटना के पीछे विमान के इंजन और अन्य पार्ट्स में तकनीकी खामी प्रमुख कारण रही।